Why not Pakistan Cricket Team play fearless Test Cricket, like England | इतना डरती है तो फिर टेस्ट क्रिकेट खेलती ही क्यों है पाकिस्तान की टीम ?

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने रावलपिंडी टेस्ट मैच के लिए इतनी बेजान विकेट क्यों तैयार कराई?इस सवाल का जवाब बहुत सीधा है,पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अति रक्षात्मक माइंडसेट के साथ क्रिकेट खेल रही है.

इतना डरती है तो फिर टेस्ट क्रिकेट खेलती ही क्यों है पाकिस्तान की टीम ?

रावलपिंडी में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच पहला टेस्ट

Image Credit source: PCB

इंग्लैंड की टीम17साल बाद पाकिस्तान के दौरे पर है. इस दौरे में तीन टेस्ट मैच खेले जाने हैं. पहला टेस्ट मैच रावलपिंडी में खेला जा रहा है. मैच के पहले ही दिन इंग्लैंड ने पाकिस्तान की टीम को बैकफुट पर ढकेल दिया है. आज मैच का दूसरा दिन है और पाकिस्तान के सामने 657रनों का पहाड़ है. इससे पहले मैच के पहले दिन पाकिस्तान के गेंदबाजों की इतनी धुनाई हुई कि रिकॉर्ड बुक में तमाम उथल पुथल मच गई. इंग्लैंड ने पहले दिन 4विकेट पर506रन ठोंक दिए थे. इसमें चार इंग्लिश खिलाड़ियों ने शतक लगाया.

आप गेंदबाजों की दुर्दशा इसी बात से समझ सकते हैं कि इसमें से तीन शतक सौ से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से बनाए गए. जाहिद महमूद ने 235रन दिए. नसीम शाह ने 140और मोहम्मद अली ने124रन दिए. अब पिछले कुछ घंटे से लगातार बवाल इस बात पर हो रहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस टेस्ट मैच के लिए इतनी बेजान विकेट क्यों तैयार कराई?इस सवाल का जवाब बहुत सीधा है,पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अति रक्षात्मक माइंडसेट के साथ क्रिकेट खेल रही है. यानी अपने घर में मैच जीतने की बजाए उसका लक्ष्य मैच में हार को टालना है.

बहुत निगेटिव रही पाकिस्तान कीअप्रोच

बेजान विकेट पर गेंदबाजों की पिटाई सभी ने देखी. लेकिन क्या कप्तानी पर आपने गौर किया. पाकिस्तान ने मैच के पहले दिन पहले ही सेशन में रन बचाने की रणनीति अपना ली थी. पहले घंटे के खेल के बाद ही स्लिपसे फील्डर हटा दिए गए थे. वो भी तब जबकि पाकिस्तान की टीम में डेढ़ सौ किलोेमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी हैं. डेढ़ सौ किलोमीटर से ज्यादा की रफ्तार से कान के बगल से निकलती बाउंसर दुनिया के किसी भी बल्लेबाज को पसंद नहीं आती. इन्हीं बाउंसर्स से बचने की हड़बड़ी में वो गलती भी करता है. लेकिन ना तो गेंदबाजों ने ऐसी लाइनलेंथ पर गेंदबाजी की और ना ही उन्हें ऐसी गेंदबाजी कोसपोर्टकरने वाली फील्ड प्लेसमेंट मिली. स्पिनर्स को भी उस तरह की आक्रामक फील्ड प्लेसमेंट नहीं दी गई। नतीजा हैरी ब्रुक ने एक ही ओवर में 6चौके लगाए. ये बेजान पिच का नहीं बल्कि कप्तान की रक्षात्मक सोच का नतीजा है। बाबर आजम इसके लिए सवालों के घेेरे में हैं.

पाकिस्तान ऐसेखेल करता रहा है

ऐसा नहीं है कि बेजान पिच अपने आप बन गई. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के इशारे के बिना ऐसा हो ही नहीं सकता. इसके पीछे के खेल को समझिए. बेजान पिच पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करके बड़ा स्कोर खड़ा करने का पूरा मौका रहता है. बशर्ते आप टॉस जीत ले,टॉस हारने की सूरत में जोखिम जरूर रहता है. क्योंकि फिर बड़ा स्कोर विरोधी टीम बनाती है. जैसा इंग्लैंड ने रावलपिंडी टेस्ट में किया है. लेकिन असल में ये बड़ा स्कोर कोई बहुत बड़ा खतरा नहीं है. चूंकि पिच बेजान होती है तो पाकिस्तान की टीम भी सावधानी से बल्लेबाजी कर रन जोड़ सकती हैं. पाकिस्तान के सामने इस वक्त यही चुनौती है. ऐसे मैचों में डर सिर्फ एक बात का होता है कि कहीं स्कोरबोर्ड पर रनों के पहाड़ को देखकर बल्लेबाज दबाव में न आ जाएं. अगर शुरूआती बल्लेबाजी लड़खड़ाई तो फिर लेने के देने पड़ते हैं.

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2006का भारतपाकिस्तान लाहौर टेस्ट याद कीजिए

2006यूं तो बीते जमाने की बात है लेकिन ये याद रखिएगा कि श्रीलंका की टीम पर हुए हमले के बाद कई साल तक पाकिस्तान में क्रिकेट खेला भी नहीं गया है. लिहाजा 2006से आज तक में वक्त जरूर बहुत बदला है लेकिन पाकिस्तान की सोच नहीं बदली है. 2006में भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी. राहुल द्रविड़ टीम के कप्तान थे. ऐसी ही बेजान पिच पर पहले बल्लेबाजी करके पाकिस्तान ने 650से ज्यादा रन जोड़ दिए थे. पाकिस्तान की तरफ से चार शतक लगे थे. उस टेस्ट मैच में भी शाहिद अफरीदी और कामरान अकमल जैसे खिलाड़ियों ने 100से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से रन बनाया था. स्कोर बोर्ड पर 650से ज्यादा रन का दबाव भारतीय टीम पर था. लेकिन वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ ने भी सावधानी से बल्लेबाजी कर इस खतरे को पूरी तरह टाल दिया था. दोनों बल्लेबाजों ने 410रन की साझेदारी की थी. पंकज रॉय और वीनू मांकड की 413रन की साझेदारी का रिकॉर्ड टूटते टूटते रह गया था. बाद में ये रिकॉर्ड साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों ने तोड़ा था. खैर,उस टेस्ट मैच में सहवाग ने250से ज्यादा रन बनाए थे,वो भी100से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से. लेकिन अंत में मैच ड्रॉ हो गया था. पाकिस्तान की चाहत अब भी बस यही है.

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