Why japan fans cleaned stadium after japan beat Germany in fifa world cup 2022 know the reason | जर्मनी पर जीत के बाद जापान के समर्थक स्टेडियम साफ करते क्यों नजर आए

जापान ने फीफा विश्व कप-2022 के अपने पहले मैच में बड़ा उलटफेर किया था और 2014 की विजेता जर्मनी को हरा दिया था. इस मैच के बाद जापान के फैंस स्टेडियम की सफाई करते हुए नजर आए थे.

जर्मनी पर जीत के बाद जापान के समर्थक स्टेडियम साफ करते क्यों नजर आए

कतर में इस समय फीफा विश्व कप-2022 खेला जा रहा है. (AFP Photo)

अक्षित जोशी

फीफा विश्व कप-2022 में बुधवार को अपने पहले ग्रुप-स्टेज मैच में जापान ने जर्मनी को 2-1 से हराकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. 2014 के चैंपियन जर्मनी को जापान की टीम ने एक गोल से हराया. जापान की प्रभावशाली जीत की क्लिप वायरल हो रही है और इसमें ब्लू ब्रिगेड के सपोर्टर स्टेडियम से कूड़ा और कचरा उठाकर नीले कचरे के थैले में डालते हुए नजर आ रहे हैं.

ऐसा ही नजारा रूस में 2018 के विश्व कप के दौरान भी देखने को मिला था जब बेल्जियम से 3-2 से हारने के बावजूद जापान के समर्थकों ने स्टेडियम की सफाई करके सभी का दिल जीत लिया था.

बाकियों से एकदम अलग

फीफा वर्ल्ड कप के मैचों में ज्यादातर देशों के प्रशंसकों का स्टेडियम में बेकाबू हो जाने का एक लंबा इतिहास रहा है. कह सकते हैं कि फुटबॉल और हिंसक समर्थकों का चोली दामन का साथ रहा है.अनियंत्रित भीड़ अक्सर सड़कों पर निकल जाती है और अराजकता फैलाने वालों व असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाती है. शराब के नशे में झगड़े से लेकर नस्लवादी तानों तक को लेकर विश्व कप हमेशा से बदनाम रहा है.

ऐसे माहौल में जापान के समर्थकों का स्टेडियम से कचरा उठाने का कदम वाकई मायने रखता है, हालांकि जापानी समर्थक अजीबोगरीब परिधानों में और अक्सर फेस पेंट के साथ स्टेडियम में नजर आते हैं लेकिन साफ-सफाई और अच्छे शिष्टाचार की विशिष्ट आदत ने उन्हें हमेशा से बाकी दर्शकों से अलग रखा है. जापान स्थित फुटबॉल पत्रकार स्कॉट मैकइंटायर ने 2018 में बीबीसी को बताया था कि स्टेडियम को इस तरह साफ करना फुटबॉल संस्कृति का ही हिस्सा नहीं, बल्कि जापानी संस्कृति का भी हिस्सा है.

स्कॉट मैकइंटायर ने कहा था कि आप अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं कि फुटबॉल संस्कृति का प्रतिबिंब होता है. जापान के समाज का एक महत्वपूर्ण पहलू यह सुनिश्चित करना रहा है कि चारों ओर संपूर्ण सफाई हो और हर खेल के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाता है. बेशक फुटबॉल के साथ भी ऐसा होता है.

सांस्कृतिक महत्व

बुधवार को जापान के प्रशंसकों ने जो अनुकरणीय व्यवहार दिखाया है, उसके पीछे की वजह जापानी समाज की संस्कृति और ताने-बाने में छिपी है.जापान के लोग स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए इसे एक खास गुण मानते हैं. ग्रैफिटी आर्ट से जापान के शहरों को ऐसे कोई समस्या नहीं है लेकिन वहां कूड़ा इतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी कि एशिया के अन्य बड़े शहरों में है.

इसकी वजह ये है कि जापान में निवासियों को हर समय अपने पर्यावरण को स्वच्छ और साफ रखने के महत्व के बारे में याद दिलाया जाता है. जापान जाने वाले विदेशी पर्यटक अक्सर इस बात पर गौर करते हैं कि वहां कस्बों और शहरों की गलियों में डस्टबिन नहीं रखे जाते हैं. हालांकि जापानियों के लिए इसमें कुछ भी अनूठा नहीं है क्योंकि अपना कूड़ा साथ ले जाकर अपने घर के डस्टबिन में फेंकना उनकी संस्कृति का हिस्सा है. और अगर ऐसा करना मुमकिन नहीं होता है तो आप अपने निकटतम सुविधा स्टोर के कूड़ेदान का इस्तेमाल कर सकते हैं. बेशक,आमतौर पर जापानी सड़कों पर कूड़ेदान नहीं मिलने का यही एकमात्र कारण नहीं है.

दरअसल, अपने पर्यावरण के प्रति सम्मान रखने का यह विचार जापानियों को बेहद कम उम्र से ही सिखाया जाता है.वहां बच्चों को अपने स्कूलों को साफ करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. ऐसा उपलब्ध बाल श्रम का उपयोग करने के लिए नहीं होता बल्कि भावी पीढ़ी को जीवन कौशल, पर्यावरण जागरूकता और दूसरों के प्रति सम्मान सिखाने के लिए वहां ये सामाजिक नियम बनाए गए हैं.

Eikaiwa स्कूलों की एक लोकप्रिय श्रृंखला Aeon, जो बातचीत के स्तर की अंग्रेजी सिखाती है, अपने यहां किसी भी सफाई कर्मचारी को नियुक्त नहीं करती है. इसकी साफ सफाई का जिम्मा शिक्षकों और इसे चलाने वाले एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ पर होता है. जापान में एक कहावत है: तात्सु तोरी अतो वो निगोसाजु (Tatsu tori ato wo nigosazu) जिसका हिंदी अर्थ है कि कोई भी पक्षी उस घोंसले को भी कभी खराब नहीं करता जिसे वो छोड़ने वाला होता है.

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