What is the importance of carb rinsing during football match details in hindi | फीफा वर्ल्ड कप: मैदान में कार्ब रिंजिंग की क्या अहमियत है, मैच के दौरान क्यों थूकते हैं खिलाड़ी?

मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट अस्पताल में हेड डायटिशियन डॉ. अमरीन शेख के मुताबिक, ‘लंबे समय के खेल में कार्ब से भरपूर ड्रिंक पीने से खिलाड़ियों के दिमाग को एनर्जी मिलती है.

फीफा वर्ल्ड कप: मैदान में कार्ब रिंजिंग की क्या अहमियत है, मैच के दौरान क्यों थूकते हैं खिलाड़ी?

कार्ब रिंजिंग

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स्नेहा कुमारी: कतर में ऐतिहासिक फीफा विश्व कप 2022 के मैच जारी हैं. आप फुटबॉल के फैन हों या नहीं, लेकिन आप इस खेल के प्रति उमड़ने वाले उत्साह को नजरअंदाज नहीं कर सकते. अगर आप भी मैच का मजा उठा रहे हों तो खेल के दौरान आपने अक्सर खिलाड़ियों को मुंह में लिक्विड भरते और फिर उसे निगलने की जगह थूकते जरूर देखा होगा. अब सवाल उठता है कि आखिर वे ऐसा क्यों करते हैं?

बताया जाता है कि इसके पीछे भी कोई विज्ञान है और इससे खेल के दौरान खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस बेहतर हो जाती है. हालांकि रिसर्च और खेल से जुड़े विशेषज्ञों के दावे इससे एकदम उलट हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खिलाड़ी आखिर ऐसा क्यों करते हैं यह तो साफ नहीं है लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को कार्ब रिंजिंग (Carb rinsing) कहा जाता है.

खिलाड़ियों को मिलती हैं एनर्जी

मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट अस्पताल में हेड डायटिशियन डॉ. अमरीन शेख के मुताबिक, ‘लंबे समय के खेल में कार्ब से भरपूर ड्रिंक पीने से खिलाड़ियों के दिमाग को एनर्जी मिलती है और वे चुस्त-दुरुस्त बने रहते हैं. हालांकि, खेलते समय पानी या कोई भी पेय पीने से पेट में सूजन आ सकती है या पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है. ऐसे में खिलाड़ी मुंह में सूखेपन से बचने के लिए लिक्विड के घूंट भरना और उसे थूकना पसंद करते हैं.’

उन्होंने बताया, ‘इससे खिलाड़ियों को अपनी परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिलती है. धावकों पर हुई रिसर्च में यह साबित हुआ है कि टूर्नामेंट के दौरान कार्ब रिंसिंग करने से उन्हें कम थकान महसूस होती है.’ हालांकि, फुटबॉल प्लेयर्स को इससे होने वाले फायदों पर ज्यादा रिसर्च नहीं हुई है. इसे लेकर कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं. ऐसे में यह सिर्फ खिलाड़ियों का विश्वास हो सकता है कि कार्ब रिंसिंग काम करता है, जिसके चलते वे खेल के दौरान ऐसी प्रैक्टिस करते रहते हैं.’

कार्बोहाइड्रेट रिसेप्टर्स से बेहतर होता है काम करने का तरीका

अब तक हुई कई स्टडी में यह बात सामने आई है कि इस प्रैक्टिस में कार्बोहाइड्रेट के घोल को करीब पांच से 10 सेकेंड तक अपने मुंह में घुमाना और इसे बाहर थूकना शामिल है. भले ही यह अभ्यास आभासी लग सकता है, लेकिन कई स्टडी से पता चलता है कि कार्ब रिंजिंग से हाई इंटेंसिटी वाली एक्टिविटी के दौरान एथलेटिक परफॉर्मेंस करीब एक घंटे तक बढ़ जाती है.

अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि एक्सरसाइज के दौरान लार यानी सलाइवा में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है. जो MUC5B नाम का एक तरह का बलगम होता है. इस प्रोटीन की वजह से लार गाढ़ी हो जाती है और उसे निगलने में दिक्कत होती है. यही वजह है कि फुटबॉलर्स अक्सर थूकते हुए नजर आते हैं, भले ही देखने में ऐसी चीजें अच्छी नहीं लगती हैं.

इस पर पहली स्टडी 2004 में साइकलिस्ट पर की गई. करीब 40K टाइम ट्रायल में कार्ब वॉश करने वाले राइडर्स की टाइमिंग एक मिनट तेज थी. वहीं, तलवारबाजों पर एक स्टडी की गई, जिसमें कार्ब रिंजिंग के बाद फेफड़ों ज्यादा अच्छी तरह से काम करते पाए गए.

2014 में कैनेडियन स्पोर्ट इंस्टिट्यूट पैसिफिक के फिजियोलॉजिस्ट ट्रेंट स्टेलिंगवर्फ ने कार्ब रिंजिंग पर लिखे गए साहित्य की समीक्षा की और कुल 679 लोगों पर हुई 61 स्टडी की जांच की. उनके रिव्यू में सामने आया कि 82 फीसदी स्टडीज में पानी से कुल्ला करने के मुकाबले परफॉर्मेंस में काफी ज्यादा फायदा हुआ.

कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन जरूरी

गौर करने वाली बात यह है कि रनर्स को अपने ग्लाइकोजन स्टोर को पूरा रखने और दौड़ने के जरूरी एनर्जी के लिए आखिरकार कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने की जरूरत पड़ती है. करीब एक घंटे तक चलने वाले परिश्रम के दौरान रिंसिंग काफी अच्छी तरह काम करता है. डॉ. शेख ने बताया कि बिना किसी लिक्विड का सेवन किए सिर्फ सलाइवा थूकने से डिहाइड्रेशन हो सकता है, क्योंकि इसकी वजह से सलाइवा गाढ़ा हो सकता है.

लाइव साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया कि एक परिकल्पना यह भी है कि मुंह में मौजूद कार्बोहाइड्रेट रिसेप्टर्स मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों को सक्रिय करते हैं, जिससे काम करने के तरीके या शरीर के मूवमेंट में सुधार होता है.

सिर्फ पानी पीना काफी नहीं

स्पोर्ट्स परफॉर्मेंस न्यूट्रिशियनिस्ट और मेटाबोलिक डिसऑर्डर एक्सपर्ट वैभव गर्ग के मुताबिक, ‘मैच के दौरान खिलाड़ी जिस चीज के घूंट भरते हैं या पीते हैं, उसे इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक कहा जाता है. यह ड्रिंक तीन वजह से इस्तेमाल की जाती है. पहली वजह कि उन्हें पसीना काफी ज्यादा आता है. दूसरी वजह यह कि उनकी मांसपेशियां लगातार सिकुड़ती और फैलती रहती हैं. और तीसरी वजह यह कि उनका ब्लड सर्कुलेशन काफी तेजी से हो रहा होता है. ऐसे में मस्तिष्क ब्लड को शरीर के उस हिस्से की ओर भेजता है, जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है. इंसानों का शरीर इसी तरह काम करता है.’

पोषक तत्वों की होती है जरूरत

गर्ग ने जोर देते हुए कहा कि क्रिकेट के मुकाबले फुटबॉल जैसे खेल में शरीर के लिए पोषक तत्वों की जरूरत काफी ज्यादा होती है, इसलिए पोषण संबंधी जरूरतें बदल जाती हैं. फुटबॉल में कार्बोहाइड्रेट और वसा का सेवन ज्यादा होता है. कार्बोहाइड्रेट के अलावा एथलीट्स के इलेक्ट्रोलाइट इनटेक में लिपिड भी शामिल होते हैं. यह सब क्रिकेट से एकदम अलग होता है.

ज्यादातर लोग इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत से अनजान होते हैं. उन्होंने बताया कि जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं, वे गलती से यह बात मान लेते हैं कि सिर्फ पानी पीना ही पर्याप्त है, लेकिन इलेक्ट्रोलाइट्स भी बेहद जरूरी हैं.

वैभव गर्ग ने बताया, ‘इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे ब्लड का अनिवार्य हिस्सा हैं. अगर मस्तिष्क में इनकी सप्लाई कम होती है या इसमें रुकावट आ जाती है तो मस्तिष्क ठीक तरह से काम नहीं कर पाएगा. डिहाइड्रेशन की वजह से कंफ्यूजन और ब्रेन फॉग की स्थिति बन सकती है.’

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