Unemployment rate in india fell know what NSO data says | देश में कम हुई बेरोजगारी, शहरी इलाकों में घटी दर; जानें क्या कहते हैं आंकड़े

देश में बेरोजगारी घट गई है. दरअसल, राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग यानी NSO के डेटा के मुताबिक, शहरी इलाकों में 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए बेरोजगारी की दर 9.8 फीसदी से घटकर 7.2 फीसदी पर पहुंच गई है.

देश में कम हुई बेरोजगारी, शहरी इलाकों में घटी दर; जानें क्या कहते हैं आंकड़े

देश में बेरोजगारी घट गई है.

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देश में बेरोजगारी घट गई है. दरअसल, राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग यानी NSO के डेटा के मुताबिक, शहरी इलाकों में 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए Unemployment की दर 9.8 फीसदी से घटकर 7.2 फीसदी पर पहुंच गई है. यह आंकड़ा 30 सितंबर को खत्म हुई तिमाही के लिए है. यह बात पेरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे यानी कि पीएलएफएस ने बताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे Coronavirus Pandemic के बाद स्थिर आर्थिक रिकवरी की ओर संकेत मिलता है, जिसने करोड़ों लोगों को बेरोजगार कर दिया था.

महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर भी घटी

इस सर्वे में पता चलता है कि महिलाओं के बीच शहरी इलाकों में बेरोजगारी की दर जुलाई-सितंबर की अवधि में एक साल पहले के 11.6 फीसदी से घटकर 9.4 फीसदी हो गई है. अप्रैल-जून में यह 9.5 फीसदी रही थी.

हालांकि, यह तुलना जुलाई से सितंबर 2021 की अवधि से की गई है, जब देश में कोरोना से संबंधित प्रतिबंधों के बड़े असर की वजह से दरें बढ़ गईं थीं. डेटा के मुताबिक, अप्रैल से जून 2022 के बीच 15 साल से ज्यादा उम्र के लिए बेरोजगारी दर शहरी इलाकों में 7.6 फीसदी थी.

NSO ने यह सर्वे अप्रैल 2017 में लॉन्च किया था. इस सर्वे के आधार पर, एक तीमाही का बुलेटिन लाया जाता है, जिसमें लेबर फोर्स के आंकड़े मिलते हैं. इनमें बेरोजगारी दर, वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो (WPR), लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) शामिल हैं.

कैसे तैयार होता है डेटा?

आपको बता दें कि पेरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे यानी कि पीएलएफएस के पहले से नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन जिसे एनएसओ भी कहा जाता है, रोजगार और बेरोजगार दर का आंकड़ा जारी करता है. मिनिस्ट्री फॉर स्टैटिस्टिक्स के तहत काम करने वाला एनएसओ 5 साल पर रोजगार और बेरोजगारी का आंकड़ा जारी करता है. यह आंकड़ा सामाजिक-आर्थिक सर्वे प्रोग्राम के तहत जारी किया जाता है.

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अप्रैल 2017 में देश का पहला कंप्यूटर आधारित सर्वे लॉन्च किया गया था, जिससे लेबर फोर्स में हिस्सेदारी और रोजगार की स्थिति को आंका जा सके. शहरी इलाकों में हर तीन महीने में करंट वीकली स्टेटस (सीडब्ल्यूएस) के आधार पर इसका आंकड़ा जारी किया जाता है. सभी उम्र के लोगों के लिए करंट वीकली स्टेटस के आधार पर इस दर का हिसाब लगाया जाता है.

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