Today flour price flour price hike wheat price increased wheat price today | मंहगाई की मार, आटे की कीमतों में जोरदार उछाल, चीनी-चावल के करीब पहुंची कीमतें

अप्रैल-सितंबर के दौरान, भारत ने 45.53 लाख मीट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान निर्यात किए गए 23.72 लाख मीट्रिक टन से अधिक था. इसी तरह आटे का निर्यात भी ज्यादा रहा है.

मंहगाई की मार, आटे की कीमतों में जोरदार उछाल, चीनी-चावल के करीब पहुंची कीमतें

सांकेतिक फोटो

गेहूं की कीमतो में लगातार उछाल जारी है, जिससे आंटे के रेट पर भी असर पड़ा है. अब ब्रांडेट के साथ- साथ नॉर्मल आंटे भी महंगे हो गए हैं. इससे आम लोगों का आर्थिक बजट बिगड़ गया है. खास बात यह है कि आंटे के साथ चावल की कीमतों में भी इजाफा जारी है. मंगलवार को आंटे का खुदरा मूल्य 36.98 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह रेट एक साल पहले दर्ज किए गए 31.47 रुपये प्रति किलोग्राम से 17.51 ​​प्रतिशत अधिक है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कीमतों में इजाफा का आलम यह है कि अब आटे की कीमत चावल के 37.96 रुपये प्रति किलो भाव के लगभग बराबर हो गई है. वहीं, चीनी 42.69 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई है. इसी तरह गेहूं का खुदरा मूल्य में भी 12.01% का इजाफा हुआ है. यह एक साल पहले के 28.34 रुपये प्रति किलो से बढ़कर इस साल 22 नवंबर को 31.77 रुपये प्रति किलो हो गया है.

पिछले साल की तुलना में दोगुना हो गया है

वहीं, जानकारों का कगहना है कि इस देश में गेहूं का उत्पादन106 मिलियन टन कम हुआ है. साथ ही यूक्रेन -रूस युद्ध की वजह से भी अधिक मांग के कारण इस वर्ष की शुरुआत से ही गेहूं और आटे की कीमतें बढ़ रही हैं. जबकि सरकार ने इस साल 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में वास्तविक शिपमेंट पिछले साल की तुलना में दोगुना हो गया है.

2.04 लाख मीट्रिक टन से अधिक था

अप्रैल-सितंबर के दौरान, भारत ने 45.53 लाख मीट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान निर्यात किए गए 23.72 लाख मीट्रिक टन से अधिक था. इसी तरह आटे का निर्यात भी ज्यादा रहा है. अप्रैल-सितंबर 2022 के दौरान, भारत ने 4.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं के आटे का निर्यात किया, जो पिछले साल इसी अवधि के 2.04 लाख मीट्रिक टन से अधिक था.

केंद्र ने गेहूं की जगह चावल उपलब्ध कराया था

इस साल अगस्त में सरकार ने आटा निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि, इसके बाद भी गेहूं और आटा की घरेलू कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई. वहीं, केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक ऐतिहासिक रूप से कम हो गया है. 1 नवंबर, 2022 तक, केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 210.46 लाख मीट्रिक टन था, जो एक वर्ष पहले दर्ज 419.81 लाख मीट्रिक टन का लगभग आधा हो गया है. इस वर्ष गेहूं के घटते स्टॉक और कम खरीद को देखते हुए, सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत कई राज्यों के लिए गेहूं और चावल के आवंटन में संशोधन किया था. कई राज्यों के लिए केंद्र ने गेहूं की जगह चावल उपलब्ध कराया था.

वृद्धि लगभग 7% रही है

वहीं, बुधवार को, खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने मीडिया को बताया कि सरकार ने गेहूं, आटा (गेहूं) और टूटे चावल के लिए पहले ही निर्यात नियम लागू कर दिए हैं, और इसके परिणामस्वरूप कीमतें “ठंडी” हो गई हैं. उन्होंने कहा कि एक साल पहले की तुलना में गेहूं की कीमतों में 10% से 15% की वृद्धि हुई है, लेकिन जिस तारीख को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था, उसकी तुलना में यह वृद्धि कम है. बता दें कि निर्यात नियम मई में लागू किए गए थे. तब से, वृद्धि लगभग 7% रही है.

techo2life

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *