Schools in India Accredition From NABET Under NEP Latest Data | कैसे पता चलेगा कैसा है स्कूलों का हाल? 15 लाख में से सिर्फ 7000 को मिला एक्रेडिशन

देश में अब स्कूलों को ‘नेशनल एक्रेडिशन बोर्ड ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग’ (NABET) से एक्रेडिशन लेने को कहा जा रहा है. देश के सिर्फ 7000 स्कूलों को ही NABET से एक्रेडिशन मिला है.

कैसे पता चलेगा कैसा है स्कूलों का हाल? 15 लाख में से सिर्फ 7000 को मिला एक्रेडिशन

स्कूल जाते बच्चे

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भारत में 15 लाख स्कूलों में से सिर्फ 7000 स्कूलों को ही एक्रेडिशन मिली हुई है. इस तरह देश के सिर्फ 0.5 फीसदी स्कूल ही एक्रेडेटेड हैं. मुंबई में आयोजित ‘क्वालिटी कंट्रोल एंड एक्रेडिशन ऑफ स्कूल’ के दौरान इसकी जानकारी दी गई. दरअसल, न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को ध्यान में रखते हुए ‘नेशनल एक्रेडिशन बोर्ड ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग’ (NABET) अब स्कूलों को भी एक्रेडिशन करवाने के लिए कह रहा है. इससे पैरेंट्स और स्टूडेंट्स को स्कूलों में एडमिशन से पहले वहां के बारे में ज्यादा जानकारी मिल पाएगी.

वर्तमान में कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को संबंधित संस्थान से एक्रेडिशन लेना पड़ता है. अगर सामान्य भाषा में एक्रेडिशन का मतलब समझें, तो एक बोर्ड द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने पर किसी एजुकेशनल संस्थान को ग्रेडिंग दी जाती है. ये ग्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा की गुणवत्ता और फैकल्टी, सुरक्षा समेत अन्य बातों को ध्यान में रखते हुई दी जाती है. कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को ये ग्रेडिंग National Assessment and Accreditation Council (NAAC) देता है.

क्या है NABET?

वहीं, अब NEP के तहत NABET का गठन किया गया है, जो लगभग NAAC की तरह ही काम करता है. इसका काम स्कूलों को ग्रेडिंग देना है. NABET क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया का बोर्ड है. इसके चेयरपर्सन पीआर मेहता ने कहा, ‘जब हम वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ रहे हैं, तो हमारे एजुकेशन सिस्टम का मूल्यांकन करने के लिए एक्रेडिशन बेहद जरूरी है.’

मेहता ने बताया कि एक्रेडिशन के तहत एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स के इंफ्रास्ट्रक्चर, इंस्ट्रक्शनल मेथड और स्टूडेंट्स के रिजल्ट के आधार पर स्वतंत्र ऑडिट करना शामिल है. उन्होंने कहा, ‘हम क्लासरूम में रिसर्च का वातावरण तैयार करना चाहते हैं. हमारा मकसद स्टैंडर्ड और क्वालिटी को बढ़ाना है. साथ ही साथ सभी को एक समान मौके देना है. वर्तमान जरूरत समग्र विकास पर ज्ञान प्रदान करना है.’

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वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के चांसलर जी विश्वनाथन ने कहा, भारत अब एजुकेशन पॉलिसी की तुलना दुनिया से कर सकता है. 75 साल में हमने शिक्षा पर 3.5 फीसदी खर्च किया है, जिसे बढ़ाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुनिया के विकसित देशों में शिक्षा पर खर्च बहुत अधिक है. एक्रेडिशन के साथ गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा देना सरकार के लिए जरूरी है.

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