Satire A morning walk of Rampreet | Satire- एक मॉरनिंग वॉक ऐसा भी…

वो हुआ ये कि जैसे ही सरकार बदली रामप्रीत का एक मलाईदार पद से उस पद पर स्थानांतरण हो गया जो बिल्कुल सूखा सूखा था. सो रामप्रीत को घूस मिलनी एकदम ही बंद हो गई थी, वैसे भी उसे सौ पचास से ज़्यादा कोई देता भी न था, सो उसने नया आइडिया निकाला. पढ़िए शैलेश त्रिपाठी का ये Satire…

Satire- एक मॉरनिंग वॉक ऐसा भी...

पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)

Image Credit source: File Photo

वो हुआ ये कि जैसे ही सरकार बदली रामप्रीत का एक मलाईदार पद से उस पद पर स्थानांतरण हो गया जो बिल्कुल सूखा सूखा था. सो रामप्रीत को घूस मिलनी एकदम ही बंद हो गई थी, वैसे भी उसे सौ पचास से ज़्यादा कोई देता भी न था, सो उसने नया आइडिया निकाला. अब जब भी कोई क्लाइंट आता वो आंख मार के कैंटीन की ओर बढ़ लेता कि चलूं कुछ खा लूं बड़ी भूख लगी है, क्लाइंट इशारा समझ पीछे पीछे लग लेता और जो भी हैवी हैवी आइटम रामप्रीत खाता उसका पेमेंट कर के अपना काम करा लेता.

ये आइडिया रामप्रीत के ही कार्यालय के उसके एक परम विरोधी कर्मचारी नेता ने अपने अंत समय में बताई थी जिनका निधन अल्पायु में ही हो गया था, इस चक्कर में रामप्रीत पिछले एक हफ्ते से रोज पच्चीसों गिलास जूस, दर्जनों समोसे, ढेर सारी रबड़ी कचौड़ी, मोमो, पिज्जा, बर्गर आदि खा रहा था, आजकल तो वह घर से बस कुल्ला करके आफिस आ जाता था, एक दिन जब वो दफ़्तर की सीढ़ियां चढ़ रहा था तो एकाएक उसे चक्कर आ गया और वह गिर पड़ा, होश तो ख़ैर पानी के छींटे मारने और जूता आदि सुंघाने आदि से आ गया, पर सावधानी के लिए उसने एक डाक्टर को दिखाया, जिसने उसके नाना प्रकार के टेस्ट कराए और उसके आधार पर उसे करीब सवा किलो दवाइयां दीं और कहा कि रोज सुबह आधा घंटा टहला भी करिए नहीं तो कभी भी कुछ हो सकता है.

रामप्रीत डर गया सो उसने सुबह टहलने का निश्चय किया, पहले सोचा कि यहीं सड़क पर आस पास टहल लिया जाए पर रामप्रीत के प्रिय ससुर जिनकी हर बात वो आंख मूंद के मानता था, ने उसे समझाया कि सड़क के अपेक्षा पार्क आदि में टहलने से बहुत ही ज्यादा वाला फायदा होता है, सो रामप्रीत घर से अहल-ए-सुबह निकल के स्कूटर से आठ किलोमीटर दूर एक पार्क में पहुंचा और बेमन से टहलने लगा, चार पांच मिनट ही टहलने के बाद जब उसके मन में ये फीलिंग अपने चरम पर थीं कि बहुत थक गए अब लौटना चाहिए, तभी उसने पार्क में कुछ सुंदर कन्याओं को भी टहलते हुए देखा. इससे उसके अंदर फिर से एक आशा और एक नई आशा और स्फूर्ति का संचार हुआ और उसने अपना पेट पिचकाया सीना फुलाया और होड़ लगा के टहलने लगा, तभी उसकी नजर दूर खड़े एक एंटी रोमियो दस्ते के एक खूंखार सिपाही पर पड़ी और उसने खट समय रहते अपनी दिशा बदल दी, वरना जुलूस निकलना तय था.

कुछ देर बाद जब सभी कन्याएं चली गईं तो उसे टहलना व्यर्थ लगने लगा, सो लौटने के इरादे से वह बाहर निकला तो उसके होश उड़ गए, उसकी स्कूटर ही कोई मार ले गया था, वही स्कूटर जिसे उसे अपनी छः महीने की घूस की गाढ़ी कमाई की एक एक पाई जोड़ के ख़रीदा था. पहले उसने आसपास ढूंढा फिर उसने 112 पर फोन किया, पचासों बार कॉल करने पर फोन कनेक्ट हुआ, नाना प्रकार के चुभते हुए सवाल हुए, फिर एक घंटे बाद पुलिस आई, दरोगा आते ही रामप्रीत पर भड़क उठा कि सालों, जब जानते हो कि चोर हर जगह सक्रिय हैं, तो स्कूटर में 25-30 ताले क्यों नही लगाए, और शक्ल तो तेरी खुद चोर जैसी लग रही, तेरे पास स्कूटर आई कहां से बे, पहले तो तू ओरिजनल बिल दिखा, मुझे तो तू ही पक्का जालिया लग रहा है.

जैसे-तैसे वो संतुष्ट हुआ और पास के थाने पर जा के रिपोर्ट लिखाने की सलाह देकर चलता बना, जाते-जाते उसने एक बार फिर धमकायां कि अगर तूने दुबारा चोरी की तो साले उलटा लटका दूंगा, उसके जाने के बाद तमाम लोग जुट गए और अपनी-अपनी अमूल्य राय देने लगे. जैसे-तैसे थाने में पच्चीसों बार दौड़ने पर एफआइआर लिखी गई, स्कूटर न मिलनी थी न मिली, सो दो चार दिन रुक के रामप्रीत ने फिर से टहलने का प्रोग्राम बनाया. कुछ स्कूटर न होने की मजबूरी कुछ ससुर की राय कि अबकी रामप्रीत पैदल ही पार्क की ओर चला, सुबह की ताजी-ताजी हवा अद्भुत लग रही थी.

इन्होंने ससुर को यह सूचित करने के लिए फोन लगाया जो साली ने उठा लिया, फिर तो कितना भी लम्बा रास्ता हो कट ही जाना था. पर अभी वो कुछ क़दम ही चले थे कि पीछे से बाइक पर बैठे दो लोग बड़ी तेज़ी से आए एक ज़ोर का झपट्टा मारा और मोबाइल ही छीन ले गए, मोबाइल भी अभी पिछले महीने ही घूस की गाढ़ी कमाई से ख़रीदा गया था. इस बार तो पुलिस में कम्प्लेन भी नहीं की रामप्रीत ने, दो एक दिन घर बैठे, एक सेकेंड हैंड बटन वाला मोबाइल खरीदा जिसे परमानेंट रबर बैंड से बांधे रखना पड़ता था. एक बार फिर ससुर ने हवा भरी, सो फिर वो टहलने निकले इस बार नम्बर नगर निगम द्वारा जगह जगह छोड़े हुये प्रशिक्षित पोषित और पंजीकृत दुर्दांत सांड़ का था, जिसने रामप्रीत पर बड़ी कस के कृपा बरसाई और पीछे से एक ज़ोरदार अटैक किया, लिहाज़ा रामप्रीत के दोनों पैरों में प्लास्टर शुशोभित हुआ और रामप्रीत को पैंतालीस दिन की मेडिकल लीव स्वीकृत हुई.

ग़नीमत रहा कि मामला मेडिकल तक ही सीमित रहा वरना सांड़ का अबतक का मरणोपरान्त वाला रिकॉर्ड था, सबसे ज्यादा समस्या देखने आने वालों को पूरी घटना बताने में हुई, पट्ठे एक-एक डिटेल पूछते थे, किस कलर का सांड़ था, सींगें बड़ी थीं या छोटी. फलां स्वीट हाउस के किधर हुआ, नहीं-नहीं जैसे मैं फलाने पान की दुकान से आगे बढ़ा दाहिने एक मोड़ है उसके सामने एक मैदान है. अच्छा वहीं, वही तो मैं कहूं, वहां अक्सर होता है, हमारे फुफ्फा को भी उसी सांड़ ने मारा था, उसी में मृत्यु हो गई उनकी, जैसे-तैसे दिन कटे, अब तो रामप्रीत के मन में टहलने को लेकर एक जुनून सा पैदा हो गया था, सो सर पर कफन बांध के वो एक बार फिर निकले.

इस बार पूरी तरह सतर्क थे सो गंतव्य तक पहुंचने के लिए उन्होंने गलियों का प्रयोग करने की सोची, ताकी समय भी कम लगे और थकान भी कम हो सो एक गली में घुसे पर उन्हें ये पता नही था कि उस गली के चप्पे-चप्पे पर खूंखार देसी कुत्तों का राज था जो किसी भी प्रकार की दखलंदजी करने वाले को इस तरह से सबक सिखाया करते थे, कि इलाका भी हमारा होगा और दांत भी, बस टांग तुम्हारी होगी, सो समय रहते लाख भागा दौड़ी के बावजूद उन कुत्तों ने रामप्रीत को दौड़ा दौड़ा के काटा. वो सब तो अपना सारा हिसाब चुकता करना चाहते थे, पर ऐन मौके पर एक मुहल्ले वाला आ गया और उसने इन्हें बचा लिया. तत्पश्चात सर्वप्रथम सात कुआं झांकने टाइप जैसे नीम हकीम प्रक्रियाएं हुई फिर पेट में चौदह इंजेक्शन भोंकवाने पड़े, इसके बाद तो रामप्रीत टहलने ज़रूर निकलते पर एकदम सतर्क रहते.

एकदम चौकन्ना, ज़रा सी आहट पाते ही सरपट दौड़ पड़ते. एक दिन ऐसे ही पीछे कोलाहल सुनाई दिया, वो समझ गए कि पीछे ज़रूर कोई ख़तरा है, सो वो सरपट भाग निकले, पर भागने से ख़तरा टला नहीं बल्कि कई गुना बढ़ गया, दरअसल एक उचक्का एक महिला की चेन छीन कर भाग रहा था, तो महिला ने शोर मचाया, जिस पर कुछ लोग उसके पीछे दौड़े, ठीक उसी वक़्त रामप्रीत भी दौड़ने लगे सो चोर ने चालाकी दिखाई और इनके पीछे पकड़ो-पकड़ो, मारो-मारो चिल्लाते हुए ऐसा दौड़ा कि भीड़ उसे छोड़ इनके पीछे लग गई, फिर चोर धीरे से एक गली में घुस के अंतर्ध्यान हो गया, जबकि रामप्रीत और पब्लिक का गैप बड़ी तेजी से कम हो रहा था, फिलहाल रामप्रीत को डाक्टरों ने छः महीने के लिए बिस्तर से उठने को मना किया है, उसके बाद पता चलेगा कि क्या होगा.

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