Petition demanding live streaming Hearing in High Court CJI Chandrachud said First start in Supreme Court | हाईकोर्ट में ‘लाइव स्ट्रीमिंग प्रोसेस’ शुरू हो! चीफ जस्टिस बोले- पहले सुप्रीम कोर्ट में होगा लागू

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक मॉडल को अपनाने के बारे में सोच सकता है, ताकि लिंक ‘कॉज लिस्ट’ पर हो और हम कहीं से भी लॉग-इन कर सकें.

हाईकोर्ट में 'लाइव स्ट्रीमिंग प्रोसेस' शुरू हो! चीफ जस्टिस बोले- पहले सुप्रीम कोर्ट में होगा लागू

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़.

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हाईकोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग प्रोसेस को सही तरीके से लागू करने को लेकर लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है. इस मामले पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि सभी हाईकोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग को डेवलप करने के लिए ई-समिति परियोजना के रूप में कुछ हाईकोर्ट जजों की एक समिति बनाई गई थी. अब जैसा कि मैंने अपना पदभार संभाल लिया है तो अब हमने एनआईसी (नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर) से मदद लेने का फैसला किया है. ताकि कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग करने के लिए हमारे पास अपना प्लेटफॉर्म हो.

उन्होंने आगे कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग का ये प्रोसेस पहले पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट में शुरू करते हैं और फिर इसे हाईकोर्ट तक ले जाएंगे. सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘इससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारे पास लाइव स्ट्रीमिंग के लिए न्यायिक बुनियादी ढांचा है. ऐसा इसलिए क्योंकि अभी इसका अधिकांश हिस्सा यूट्यूब पर है. वहीं, सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक मॉडल को अपनाने के बारे में सोच सकता है, ताकि लिंक ‘कॉज लिस्ट’ पर हो और हम कहीं से भी लॉग-इन कर सकें. उन्होंने कहा, ‘अभी हमें पेश होने के लिए अपील करना है और कुछ जज इसे अनुमति देने के लिए काफी उत्साहित हैं. यहां शीर्ष अदालत में एक समान नीति की जरूरत है.

जिला अदालतों में लाइव स्ट्रीमिंग!

गुजरात हाईकोर्ट के सीजे अरविंद कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट के अलावा वह सभी जिला अदालतों में भी लाइव स्ट्रीमिंग का विस्तार करना चाहते हैं. सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि सोशल मीडिया में यूट्यूब से उठाकर लाइव स्ट्रीमिंग के हिस्से को चला देते हैं. उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के पास कॉपीराइट है. मुझे न्यायिक संस्थान की पवित्रता भी बनाए रखनी होती है. ये 10 सेकंड की क्लिप अक्सर बिना संदर्भ के होती हैं. हम इसकी जांच कर रहे हैं.’ सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अब अगली सुनवाई अगले साल के पहले महीने यानी जनवरी के तीसरे हफ्ते में होगी.

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसा राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल हाईकोर्ट में भी कर सके. मालूम हो कि शीर्ष अदालत ने इस साल सितंबर में संविधान पीठों के सामने सुनवाई के लाइव प्रसारण को शुरू करने की एक ऐतिहासिक पहल की थी. वीडियो देखने वाले लाखों लोगों ने लाइव-स्ट्रीमिंग को लेकर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया था.

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