Maharashtra karnataka border dispute is creation of jawahar lal nehru or this is just a bjp new strategy against opposition au154 | महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद क्या नेहरू की गलती, या फिर ऐंवई BJP ने नया राग अलापा है?

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद साठ साल पुराना है. लेकिन दोनों बीजेपी शासित राज्यों में यह मुद्दा आज फिर क्यों गरमा रहा है, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. इस मुद्दे पर नेहरू को टारगेट करने की क्या वजह है?

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद क्या नेहरू की गलती, या फिर ऐंवई BJP ने नया राग अलापा है?

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू

Image Credit source: Wikimedia Commons

दो बड़े बीजेपी शासित राज्यों यानी कर्नाटक-महाराष्ट्र का सीमा विवाद साठ साल से ज्यादा पुराना है, लेकिन बार-बार किसी भूले-बिसरे गीत का रीमिक्स वर्जन बन कर सामने आ जाता है. एक बार फिर यह मुद्दा गरम है. इस दौरान महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री और बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने इस विवाद के लिए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को यह कह कर जिम्मेदार बता दिया कि भारत में राज्यों का गठन भाषाई आधार पर होने के बावजूद उन्होंने मराठीभाषी बेलगावी (बेलगाम), बीदर, कारवार, धारवाड़, भालकी, निपाणी जैसे इलाके कर्नाटक को क्यों दिए?

इस पर TV9 भारतवर्ष डिजिटल से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े एक बड़ी रोचक कहानी बताते हैं. वे कहते हैं कि एक बार दो भाइयों में झगड़ा हुआ, जज ने पूछा क्या हुआ? तो एक ने कहा कि इसने मेरा सर फोड़ दिया. दूसरे ने कहा क्योंकि इसने मेरी गाय को मारा. जज ने पूछा गाय कहां है, उसको पंचनामा में जब्त किया क्या? दोनों भाइयों ने कहा कि गाय तो है ही नहीं. जज ने कहा फिर मसला क्या है? फिर पहले भाई ने बताया कि मैं बाजार जा रहा था गाय लाने, दूसरे ने कहा मत लाओ मेरे खेत में आकर चरेगी. लेकिन मैं अड़ गया कि मैं तो लाऊंगा. दूसरे ने कहा कहां बांधेगा? मैंने कहा अपने खूंटे से. दूसरा बोला, खूंटे से छूटकर मेरे खेत में घुस गई तो? मैंने कहा, ये लो घुस गई. फिर दूसरा खेत पर लाठियां पीटने लगा. मैंने कहा क्या कर रहा है? दूसरे ने कहा तेरी गाय मेरे खेत में घुस गई उसे मार रहा हूं. फिर मैंने कहा, तू मेरी गाय के सर पर मारेगा तो मैं भी तेरा सर फोड़ दूंगा. और मैने इसका सर फोड़ दिया. गाय आई ही नहीं और एक भाई का सर फूट गया. यानी पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला हुआ नहीं और दोनों राज्यों के इस विवाद को बिना वजह गरमाया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी नहीं आया, फिर भी विवाद क्यों गरमाया?

वानखेड़े कहते हैं कि नेहरू हर राज्य का बॉर्डर तय करने के लिए चॉक लेकर तो नहीं बैठे थे कि यह इलाका उनको दे दूंगा, तो वो उनको दे दूंगा. एक कमिटी गठित की गई थी, जो यह तय कर रही थी. हां ठीक है, वे प्राइम मिनिस्टर थे, उनकी कैबिनेट थी. बाकी राज्यों में भी डिस्प्यूट है. असम और मेघालय का भी है. हर जगह नेहरू का नाम घुसाने का क्या तुक है? जो कहना है, सुप्रीम कोर्ट में कहिए ना, पब्लिक में हवाबाजी करने की क्या जरूरत है?

BJP का कर्नाटक-महाराष्ट्र में असर घट रहा, यह विवाद इसलिए जोर पकड़ रहा?

चेन्नई में स्थित न्यू इंडियन एक्सप्रेस के सह संपादक सुधीर सूर्यवंशी SC के फैसले से पहले विवाद गर्म होने की टाइमिंग को लेकर कहते हैं कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को कर्नाटक में बहुत अच्छा रेस्पॉन्स मिला है. मल्लिकार्जुन खर्गे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से भी कर्नाटक में कांग्रेस मजबूत हुई है. राज्य में बीजेपी कमजोर होती जाएगी तो सीएम बोम्मई के लिए मुश्किल हालात पैदा होंगे. इसलिए बोम्मई ऐक्शन में दिख रहे हैं.

दूसरी तरफ महाराष्ट्र में भी कांग्रेस, एनसीपी और ठाकरे गुट मिल कर बार-बार शिंदे सरकार को मिंधे सरकार कह कर उनके कमजोर सीएम होने की छवि बना रही है. यह बात बीजेपी को असहज कर रही है. इसलिए बीजेपी ने कर्नाटक अस्मिता और महाराष्ट्र की अस्मिता का मुद्दा उछाल दिया है. यह प्राइड पॉलिटिक्स से जो माहौल बनेगा बीजेपी उसकी फसल काटना चाह रही है.

नेहरू की जिम्मेदारी नहीं बनती है क्या? BJP बिना तथ्य आरोप मढ़ रही है क्या?

सुधीर सूर्यवंशी कहते हैं कि यह मामला तब उठा जब आजादी के बाद तमिलनाडू से भाषा के आधार पर राज्यों के गठन की मांग उठी. राज्य पुनर्गठन आयोग बना. लेकिन महाराष्ट्र तक आते-आते नेहरू को यह एहसास हुआ कि पूरी तरह से भाषाई आधार पर राज्यों का गठन किया गया तो प्रांत-प्रांत में झगड़े और बढ़ेंगे. इसलिए उन्होंने यहां आकर लचीला रुख अपनाया.

लेकिन वरिष्ठ पत्रकार प्रसाद काथेइस तर्क को स्वीकार नहीं करते. वे कहते हैं कि नेहरू का महाराष्ट्र द्वेष इस विवाद की अहम वजह है. वे तो मुंबई भी गुजरात को देना चाहते थे. 1956 में उन्होंने कहा था कि पांच साल के लिए मुंबई केंद्रशासित प्रदेश रहेगी. उस वक्त महाराष्ट्र से किसी ने कुछ कहा नहीं क्योंकि यहां कांग्रेस की सरकार थी इसलिए नेहरू के खिलाफ किसी को बोलने की हैसियत नहीं थी. संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में 106 लोगों की शहादत के बाद मुंबई महाराष्ट्र को मिली. उस वक्त भी आचार्य अत्रे ने कहा था कि यही समय है कर्नाटक के सीमावर्ती भागों का मामला भी सुलझा लिया जाए, आगे फिर यह कभी नहीं सुलझेगा. तब उनकी बात अनसुनी रह गई.

पत्रकारों में भी भिड़ंत- एक कहें, सही थे नेहरू के विचार, दूसरे कहें, वही जिम्मेदार

प्रसाद काथे यह भी कहते हैं मामला सिर्फ कर्नाटक के सीमावर्ती भागों का ही नहीं है. नेहरू की वजह से डांग इलाका गुजरात चला गया, जबकि यह मराठी बाहुल्य इलाका था. आज वही ठाकरे परिवार, जिनके पिता और दादा संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में नेहरू की कांग्रेस के खिलाफ शामिल हुए थे, आगामी बीएमसी चुनाव में सोनिया-राहुल की कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ने जा रहा है.

सुधीर सूर्यवंशी इस पर सवाल उठाते हुए कहते हैं आज बीजेपी फिर क्या कर रही है? सीमा विवाद फिर से खड़ा कर भौगोलिक रूप से महाराष्ट्र को कट साइज करने की कोशिश कर रही है. सांस्कृतिक रूप से महाराष्ट्र के सर्वोच्च आदर्श छत्रपति शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व को छोटा दिखाने की कोशिश में राज्यपाल कोश्यारी और सुधांशू त्रिवेदी से अपमानजनक बयान दिलवा रही है और आर्थिक रूप से महाराष्ट्र को मिलने वाले उद्योग गुजरात ले जा रही है.

यह विवाद राजनीति से सुलझ ही नहीं सकता, जस की तस रखी जाए व्यवस्था

मराठी भाषा में मशहूर कोलाज डॉट कॉम और रिंगण मैगजीन और हाल ही में उद्धव ठाकरे और प्रकाश आंबेडकर की पहले से शुरू हुए प्रबोधनकार डॉट कॉम के संपादक सचिन परब इस मुद्दे पर एक अलग राय रखते हैं. उनका कहना है कि उपाय यही है कि जो जहां है, वो वहां रहे. साठ सालों में कर्नाटक में मराठी भाषियों की नई पीढ़ी कन्नड़ सीख चुकी है और महाराष्ट्र के इलाकों में रहने वाले कन्नड़ भाषी मराठी स्कूलों में पढ़ कर बड़े हुए हैं. वैसे भी महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा और तेलंगाना की संस्कृति मिली-जुली है. यहां के लोग दक्कनी संस्कृति और सातवाहन काल के समय से घुले-मिले रहे हैं.

सचिन परब कहते हैं, फिर तो महाराष्ट्र का मराठवाड़ा भी निजामशाही के राज में था, कल को तेलंगाना उठ खड़ा होगा. उन्होंने कहा कि कर्नाटक के सबसे बड़े कवि बेंद्रे कहां के थे? पंडित भीमसेन जोशी, गिरीश कर्नाड, एम.एस.सुब्बालक्ष्मी, पु.ल.देशपांडे को महाराष्ट्र का मानेंगे या कर्नाटक का मानेंगे? कन्नड़ लोग हजारों-लाखो की तादाद में महाराष्ट्र के संत तुकाराम, ज्ञानेश्वर को मानने वाले हैं और पंढरपुर की यात्रा में आते हैं और कर्नाटक का सबसे प्रभावशाली लिंगायत समाज के प्रवर्तक कहां के थे? जब संस्कृति एक है, आदर्श एक हैं, तो जमीन का बंटवारा क्यों करना? उपाय यही है कि जो जहां, वो रहें वहां. या फिर हंगामा करने की बजाए सुप्रीम कोर्ट को फैसला करने दें. सचिन बस आखिर में एक बात कहते हैं कि कर्नाटक में जो मराठी भाषियों पर अत्याचार हुए हैं, पूर्व में जो एक द्वेष की भावना से छह-सात लोगों की जानें गई हैं, वह नहीं होना चाहिए.

ऐसे शुरू हुआ नए सिरे से विवाद, पुराने विवाद में उलझे कर्नाटक और महाराष्ट्र

चार दिनों पहले सीएम एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के दावे को पुख्ता करने के लिए एक अहम बैठक हुई. इसकी सूचना कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई को मिली. उन्होंने धांय से एक ट्वीट मार दिया और महाराष्ट्र के सांगली जिले के जत तालुका के 40 गांवों पर कर्नाटक का दावा ठोक दिया. महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया कि एक गांव भी जाने नहीं देंगे, बल्कि मराठी भाषी इलाके कर्नाटक से लेंगे. दूसरे दिन कर्नाटक के सीएम ने महाराष्ट्र के सोलापुर, अक्कलकोट पर भी दावा ठोक दिया.

दावे का आधार सिर्फ यहां कन्नड़भाषियों की ज्यादा तादाद होना ही नहीं था, यह भी तर्क था कि यहां रहने वाले लोगों को महाराष्ट्र सरकार बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दिला पा रही हैं, इसलिए वे कर्नाटक में शामिल होना चाहते हैं. इस पर फडणवीस ने कहा कि कर्नाटक के सीएम साल 2012 की बात कर रहे हैं, जब लोगों ने ऐसा प्रस्ताव रखा था. लेकिन अब महाराष्ट्र सरकार उनके पानी के मुद्दे को सुलझाने के लिए योजनाएं ला रही है. फंड की कोई कमी नहीं होगी. केंद्र से भी मदद मिल रही है.

बोम्मई-फडणवीस आपस में ही खेल रहे T-20 मैच, सारा मामला स्क्रिप्टेड?

लेकिन संजय राउत ने इसमें एक नया ऐंगल यह जोड़ दिया कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि बीजेपी शासित राज्य का एक मुख्यमंत्री दूसरे बीजेपी शासित राज्य के मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री को चुनौती दे. यह बोम्मई और फडणवीस का आपस में ही टी 20 का मैच इसलिए शुरू हुआ है क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशू त्रिवेदी के अपमानजनक बयान की वजह से महाराष्ट्र की जनता में तीव्र नाराजगी है. इसी बात से ध्यान भटकाने के लिए कर्नाटक के सीएम को बीजेपी ने एक तैयार स्क्रिप्ट दी है, बोम्मई का नया दांव सक्रिप्टेड है.

techo2life

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *