Isha Leadership Academy begins Isha Insight: DNA of Success program begins Sadhguru gives mantra to run business | ‘ईशा इनसाइट: कामयाबी का डीएनए’ कार्यक्रम का आगाज, सद्गुरू ने दिया बिजनेस चलाने का मंत्र

‘ईशा इनसाइट : कामयाबी का डीएनए’ कार्यक्रम का आगाज सद्गुरू ने अपने ओजस्वी संबोधन के साथ किया और प्रतिभागियों से कहा, ‘अपनी भावनाओ और विचारों से दूरी बनाने लगोगे तो अंतर्दृष्टि और स्पष्ट दृष्टिकोण की बढ़ोतरी होने लगेगी.’

'ईशा इनसाइट: कामयाबी का डीएनए' कार्यक्रम का आगाज, सद्गुरू ने दिया बिजनेस चलाने का मंत्र

सद्गुरू

Image Credit source: @SadhguruJV

ईशा लीडरशिप अकादमी द्वारा अयोजित वार्षिक कार्यक्रम ‘ईशा इनसाइट : कामयाबी का डीएनए’ के 11वें संस्करण के प्रथम दिन कई लोगों ने संबंधित विषय पर अपने-अपने विचार प्रकट किए. इस क्रम में ओपन नेटवर्क फोर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के सीईओ थंपी कोशी ने कहा,
‘मेरा सपना है कि कॉमर्स इस कदर परिवर्तित हो जाए कि हर तरह के विक्रेता अपने उत्पाद को ओपन नेटवर्क पर समान प्रोटोकॉल के ज़रिए प्रस्तुत करा सके.’

ओएनडीसी के बारे में दिलचस्प परिचर्चा की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए उन्होंने कहा, अनेक बायर एप्लीकेशन उपभोक्ताओं को उनके रुझान के अनुसार कुछ ही उत्पादों को उपलब्ध कराते हैं . ग्राहकों की प्राथमिकता के अनुसार सेवा सुनिश्चित होती है. सही मायने में उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से ओपन नेटवर्क,यानी एकीकृत सेवाओं सहित ओमनी-चैनल इस तरह के ताकतवर ब्रांडिंग का मोहभंग कर देगा.’

अगर आप अपने कारोबार को चलाना चाहते हो तो…

देश में लीडरशिप कार्यक्रमों की सूची में लोकप्रियता की पायदान पर अग्रणी माने जाने वाले कार्यक्रम , ‘ईशा इनसाइट 2022’ की शुरुआत सद्गुरु के ओजस्वी संबोधन के साथ हुई. ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने प्रतिभागियों को अपनी विशिष्ट शैली में संबोधित करते हुए कहा, ‘अगर आप अपने कारोबार को चलाना चाहते हो तो अपने आप को ‘मुक्ति’ की स्थिति में रखो. यानी कोई भी चीज तुम्हें छू न सके. काम में पूरी तरह से लिप्त रहो, फिर भी उलझनों से निर्लिप्त.’

भारतीय आध्यात्म के गूढ ज्ञान को व्याहवारिक रूप से प्रासंगिक बनाते हुए उन्होंने अपने विचार प्रस्तुत किए. भारतीय आध्यात्म के परम तत्व, मुक्ति के विषय पर सद्गुरु ने कहा कि जो मुक्त होने की जिज्ञासा रखता है, वह साधक कहलाता है. साधक होने के नाते वह न तो किसी चीज़ पर विश्वास करता है, न ही उसे पूरी तरह से नकारता है. स्वयं के अनुभव पर साधना के पथ पर आगे बढता है. उन्होंने अपनी चित परिचित शैली में उस गुण की तुलना एक स्व उद्यमी से की, जो साधक की तरह ही अपने काम में कार्यशील रहता है.

उद्यमी बने रहने और सतत साधना के पथ पर अग्रसर रहने की बात पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘स्व उद्यमी बनने का मतलब सिर्फ़ किसी कारोबार को चलाना नहीं होता अलबत्ता वह काम किसी साधना की तरह होता है. साधक हमेशा समाधान और संभावनाओ को खोजने के लिए तत्त्पर रहता है. अगर आप किसी चीज की खोज में नहीं तो आप उद्यमी नहीं बन सकते.’

सद्गुरु ने दिया ये मंत्र

उन्होंने कहा, ‘जिस समय काल में हम जीते है, वह हमारे कार्य का महत्वपूर्ण गुण सूचक होता है’ इस बात की अभिव्यक्ति के साथ सद्गुरु ने प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे अपने विचारों और भावनाओं की कशमश से दूरी बनाए रखे ताकि अपने आप अंतरदृष्टि स्पष्ट हो जाए और हर चीज़ साफ़ दिखाई दे. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया, ‘अगर हम जो कुछ भी कर रहें हैं, उससे दूरी नहीं बनाएंगे, खास करके-वह समय जिसमें हम जीवित है-हम वास्तविकता को देख नहीं पाएंगे. ऐसे में हम समय का परिणाम बन कर रह जाएंगे या फिर समय की उत्पीडना का शिकार.’

दिन भर चले सत्र में आगे एच एल ई ग्लासकोट लिमिटेड के मुख्य ट्रान्सफोरमेशनल अधिकारी व निदेशक अमित कालरा ने कंपनी के रूपांतरण की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला. एक अच्छी कंपनी को और भी बेहतरीन करने की प्रक्रिया के बारे उन्होंने कहा, ‘किसी भी कंपनी के तीन प्रमुख आधार स्तंभ होते हैं – लोग , निवेशक और ग्राहक . कंपनी को जीवित रखने में तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.’

अगले तीन दिनों तक चलेगा कार्यक्रम, शामिल होंगे ये दिग्गज

अगले तीन दिनों तक कार्यक्रम में नामी गिराम दिग्गज वक्ताओं से रू-ब-रू होने का मौका मिलेगा. इस सूची में लद्दाख से आए लोकप्रिय शिक्षाविद तथा पर्यावरणविद , हिमालयन इंस्टीट्यूट ओफ़ एल्टरनेटिव्स के निदेशक सोनम वांगचूक, एस वेंचर्स ग्रूप ( स्नेप डील , यूनीकॉमर्स व स्टेलेरो ) के सह-संस्थापक कुणाल बहल, बंधन बैंक के प्रबंध निदेशक व सीईओ चंद्रशेखर घोष, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, गो कलर्स ब्रांड के संस्थापक गौतम सरौगी, एक्यूस के चेयरमेन व सीईओ अरविंद मेल्लीगेरी व्यवसायिक क्षेत्र में अपने अनुभव और सीख सझा करेंगे.

इसके अलावा 20 रिरोर्स लीडर को भी चयनित किया गया है, जो कि अपने अपने व्यापार जगत के महारथी है. विविध उद्योगों में कार्यरत ये तमाम दिग्गज व्यावसयी और उद्योगपति अनुभवों का नया अध्याय जोड़ेंगे. प्रतिभागियों के लिए इक विशेष अवसर तैयार किया गया है, जहां वे इन रिसोर्स लीडर्स से सीधा संपर्क साध सकेंगे और सलाह-मशवरा प्राप्त कर सकेंगे.

ईशा लीडरशिप पहल का मकसद

ईशा लीडरशिप की परिकल्पना और संस्थापना सद्गुरू द्वारा 11 साल पहले की गई थी, जिसका एक मात्र लक्ष्य था-सर्वोच्च गुणवत्ता वाली लीडरशिप शिक्षा प्रदान कराना, बाहरी कौशल विकास के संग अंदरूनी स्वास्थ्य को बेहतर बनाना. ईशा लीडरशिप पहल का मकसद लीडरशिप यानी नेतृत्व के गुण को स्वाभाविक और आंतरिक रूप से विकसित करना है , जो सांसारिक रणनीतियों या बह्य तकनीकों से परे हो . इसका प्रेरक सिद्धांत है कि व्यक्ति अपने मन , मस्तिष्क , शरीर और ऊर्जा को नियंत्रित व प्रबंधित करना सीख लें ,ताकि बाहरी परिस्थियों व लोगों को संचालित करना आसान हो जाए .

पिछले दशक के दौरान, ईशा इनसाइट : कामयाबी के डीएनए कार्यक्र्म ने अपार ख्याति प्राप्त की है और इसे विश्व का लोकप्रिय लीडरशिप प्रोग्राम माना जाता है . इससे पूर्व अनेक दिग्गज हस्तियों ने इस कार्यक्र्म में उपस्थित होकर इनसाइट कार्यक्र्म को चार चांद लगाए हैं . इनमें से कुछ नाम है : रतन टाटा , एन आर नारायण मूर्ति, किरण मजूमदार शॉ, जी एम राव, के वी कामथ, अजय पिरामल, हर्ष मरिवाला, अरुणदत्ती भट्टाचार्या, भाविष अग्रवाल, पवन गोएंका आदि.

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