India part of meeting on Afghanistan india signed joint statement Military facilities of others in country unacceptable | अफगानिस्तान में दूसरे देशों की सैन्य मौजूदगी अस्वीकार्य, काबुल को लेकर मास्को फॉरमेट में फैसला

मास्को बैठक में रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष प्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

अफगानिस्तान में दूसरे देशों की सैन्य मौजूदगी अस्वीकार्य, काबुल को लेकर मास्को फॉरमेट में फैसला

अफगानिस्तान लंबे समय से विदेशी हस्तक्षेप की वजह से संकटग्रस्त बना रहा (सांकेतिक)

Image Credit source: AP

भारत ने अफगानिस्तान पर मास्को फॉरमेट (Moscow Format) की अहम बैठक के बाद संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जो उस देश में अन्य देशों द्वारा निर्मित सैन्य मूलभूत सुविधाओं (Military Infrastructure Facilities) को “अस्वीकार्य” बताता है. रूस, भारत और पाकिस्तान के अलावा, बैठक में चीन, ईरान, अफगानिस्तान के मध्य एशियाई पड़ोसी देशों और कई आमंत्रितों लोगों ने भी हिस्सा लिया था.

वेबसाइट द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, जहां रूस और पाकिस्तान इसके पीछे अमेरिका का संदर्भ बताते हैं तो वहीं दिल्ली मानती कि वहां पर पाकिस्तान की सैन्य उपस्थिति है. 16 नवंबर को मॉस्को में रूस की मेजबानी में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, “इस बात पर जोर दिया गया कि अफगानिस्तान और आस-पास के राज्यों में तीसरे देशों की सैन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थापना अस्वीकार्य है.”

पुनर्निर्माण की कोशिश की जाए

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि बैठक में शामिल होने वालों को यह “आश्वस्त” किया गया कि अफगानिस्तान में “20 साल की सैन्य उपस्थिति के लिए जिम्मेदार बलों” को उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के बिना अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए “मुख्य वित्तीय बोझ” लेना चाहिए.

हालांकि, यह भी साफ किया गया कि “अधिकांश प्रतिनिधिमंडल” अफगानिस्तान में लंबे समय तक अमेरिका-नाटो उपस्थिति के कारण अफगान लोगों को हुए नुकसान की भरपाई करने पर सहमत हो गए. लेकिन माना जा रहा है कि भारत इस मुद्दे पर उनके साथ नहीं है.

तालिबान शासन का उल्लेख करते हुए, बयान में कहा गया, “लोगों के बुनियादी अधिकारों और स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए अफगान अधिकारियों के प्रयासों को मजबूत करने को अहम माना गया. पक्षों ने क्रमशः न्याय और शिक्षा तक समान पहुंच प्रदान करने वाले अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों सहित सभी जातीय समूहों के मौलिक अधिकारों को लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया.

दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता का जिक्र

जारी संयुक्त बयान में पिछले साल नवंबर में हुई दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता का भी हवाला दिया गया, जिसमें पाकिस्तान और चीन को छोड़कर अफगानिस्तान के कई पड़ोसी देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने हिस्सा लिया था. अब नए बयान में कहा गया है कि “सम्मेलन में शामिल लोगों ने शांतिपूर्ण अफगानिस्तान की दिशा में संयुक्त प्रयास जारी रखने को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की.”

मास्को बैठक में रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष प्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. मेहमान के तौर पर कतर, यूएई, सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.

बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के प्रभारी विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव जेपी सिंह ने किया, जो तालिबान शासन के साथ जुड़ने वाले अहम शख्स रहे हैं. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान भाग लेने वाले देशों के विशेष दूतों के साथ भी चर्चा की.

मास्को फॉरमेट का उल्लेख करते हुए, विदेश मंत्रालय ने कहा, “बैठक के दौरान, प्रतिभागियों ने अफगानिस्तान से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें वर्तमान मानवीय स्थिति और सहायता प्रदान करने के लिए अलग-अलग हितधारकों के चल रहे प्रयास, अंतर-अफगान वार्ता का गठन शामिल है, जिससे आतंकवाद के खतरों का मुकाबला करने की कोशिश और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित कराई जा सके.

techo2life

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *