Giloy may raise immunity but is not safe for all says Mumbai doctors in their latest research | गिलोय इम्यूनिटी तो बढ़ाता है पर सबके लिए सुरक्षित नहीं, मुंबई के डॉक्टर्स ने रिसर्च में क्या पाया?

ज्यादातर लोग गिलोय को बिना एक्सपर्ट की सलाह के लेते हैं. गिलोय पर हुई हालिया रिसर्च ऐसे ही लोगों को अलर्ट करने वाली है. जानिए मुंबई के विशेषज्ञों ने अपनी रिसर्च में क्या कहा…

गिलोय इम्यूनिटी तो बढ़ाता है पर सबके लिए सुरक्षित नहीं, मुंबई के डॉक्टर्स ने रिसर्च में क्या पाया?

आयुर्वेद में गिलोय को जीवनदायनी जड़ी-बूटी बताया गया है.

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गिलोय (Giloy) को आयुर्वेद में अमृत कहा गया है. इसमें कैल्शियम, आयरन समेत कई तरह के पोषक तत्व होते हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. ज्यादातर लोग इसे बिना एक्सपर्ट की सलाह के लेते हैं. गिलोय पर हुई हालिया रिसर्च ऐसे ही लोगों को अलर्ट करने वाली है. भारतीय शोधकर्ताओं की रिसर्च कहती है, गिलोय इम्यूनिटी यानी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह इंसान के लिए सुरक्षित नहीं. जानिए मुंबई के विशेषज्ञों ने अपनी रिसर्च में क्या कहा…

पिछले साल गिलोय के कुछ ऐसे सामने आए जिससे विवाद हुआ था. मुंबई के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च की थी. रिसर्च में कहा गया था कि गिलोय (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) का इस्तेमाल करने से 6 लोगों के लिवर फेल हो गए. उस रिसर्च पर आयुर्वेद के विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे और कहा था, हो सकता है कि मरीजों ने कोई ऐसी जड़ी-बूटी का इस्तेमाल किया हो जो हूबहू गिलोय जैसी दिखती हो. मुंबई के उन्हीं शोधकर्ताओं ने अब गिलोय पर रिसर्च की है.

मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल में उन मरीजों का इलाज हुआ था. उन्हीं मरीजों का इलाज करने वाली डॉ. आभा नगराल ने यह रिसर्च की है. डॉ. आभा का कहना है, उन मरीजों में लिवर टॉक्सिसिटी की स्थिति बनी थी जो इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्या है. यह ऑटोइम्यून प्रॉब्लम है. गिलोय में इम्यूनिटी को बढ़ाने की पावर होती है, उसी के कारण ही मरीज में ऐसी स्थिति बनी. डॉ. आभा की रिसर्च जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हीपैटोलॉजी में प्रकाशित भी हुई है.

दवा भी नुकसान पहुंचा सकती है

रिसर्च में सामने आया है कि गिलोय का इस्तेमाल करने से खून में इम्यून मार्कर्स का स्तर बढ़ता है. इस तरह उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है. इसी कारण उसमें ऑटो इम्यून हेपेटाइटिस की समस्या उभरती है. ऐसे मामले खासतौर पर उन मरीजों में सामने आते हैं जो डायबिटीज और हाइपोथायरॉयडिज्म की समस्या से जूझ रहे हैं. थायरॉयड ग्लैंड का पर्याप्त मात्रा में थायरॉयड हार्मोन रिलीज न कर पाने की स्थिति को हाइपोथायरॉडिज्म कहते हैं.

TOI की एक रिपोर्ट में डॉ. आभा का कहना है, दवाओं के अपने साइडइफेक्ट्स होते हैं. इनसे भी लिवर टॉक्सिसिटी होने का खतरा रहता है. दवाओं के साथ इनके साइड इफेक्ट्स की जानकारी दी जाती है. हर्बल दवाओं के बारे में भी ऐसा ही होना चाहिए. आमतौर पर लोग मानते हैं कि सभी जड़ी-बूटियां फायदा ही पहुंचाती है, यह धारणा सही नहीं है.

लिवर के मरीजों ने खूब इस्तेमाल किया

जिन छह मरीजों पर रिसर्च की गई थी, उन्होंने कोरोनाकाल में इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए गिलोय का काफी इस्तेमाल किया था. चार मरीजों ने गिलोय के पौधे से रस निकालकर पीया. वहीं 2 ने बाजार में मिलने वाले गिलोय उत्पादों का इस्तेमाल किया था.

हालांकि इस पर पोद्दार आयुर्वेद हॉस्पिटल के पूर्व डीन और आयुष विभाग के डायरेक्टर डॉ. गोविंद खाती का कहना है, गिलोय में जीवन देने की क्षमता है. अगर इसके पौधे का छोटा सा टुकड़ा गिर भी जाता है तो उससे नया पौधा पनप जाता है. आयुर्वेद में इसे अमृत कहा गया है.

मुंबई के शोधकर्ताओं की रिसर्च रिपोर्ट आने से पहले इसी साल फरवरी में आयुष मंत्रालय ने गिलोय के इस्तेमाल से लिवर डैमेज होने की बात को खारिज किया था.

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