Exclusive News Inappropriate Premium Over Unicorns Making Bad Impact On Startup Sector TiE Founder Kanwal Rekhi | Exclusive: यूनिकॉर्न पर लगा अनुचित प्रीमियम, स्टार्टअप्स को पहुंचा रहा नुकसान, बोले TiE फाउंडर

भारत इस समय दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्टार्टअप कैपिटल बन गया है. यहसं यूनिकॉन कंपनियों की संख्या 100 के पार हो चुकी है. पर मौजूदा वक्त में इस सेक्टर का क्या हाल है, इस पर टेक उद्यमी और The Indus Entrepreneurs के फाउंडर मेंबर कंवल रेखी ने टीवी9 के राकेश खार के साथ विशेष बातचीत की…

Exclusive: यूनिकॉर्न पर लगा अनुचित प्रीमियम, स्टार्टअप्स को पहुंचा रहा नुकसान, बोले TiE फाउंडर

TiE के फाउंडर मेंबर कंवल रेखी

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भारतीय स्टार्टअप्स (Indian Start-Ups) का इन दिनों कैसा हाल है? 2021 के उत्साहजनक उछाल के बाद, जब भारत ने 100 यूनिकॉर्न (Unicorns In India) मार्क को पार कर लिया, तो अब मौजूदा कैलेंडर साल में इस सेक्टर में चौतरफा गिरावट देखी गई है. मुनाफा कम हो रहा है, वैल्यूएशन अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं और फंडिंग की स्थिति भी खराब है. आखिर क्या चीज गलत हो रही है? इस बारे में टेक उद्यमी और द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (TiE) के फाउंडर मेंबर कंवल रेखी ने कई बातों को उजागर किया. आखिर क्या कहा उन्होंने…

कंवल रेखी का कहना है कि केंद्र सरकार ने यूनिकॉर्न्स पर “अनुचित प्रीमियम” अपनाया है. इससे देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बहुत नुकसान हो रहा है. उनका कहना है कि सरकार के अलावा, उद्यमी, निवेशक और पूरा वैल्यूचेन भी मौजूदा “फंडिंग की कमी” के लिए जिम्मेदार है.

1987 में NASDAQ पर लिस्ट कराई कंपनी

कंवल रेखी ने 1987 में NASDAQ पर स्मार्ट ईथरनेट कार्ड निर्माता कंपनी एक्सेलन को लिस्टेड कराया था. ऐसा करने वाले वह पहले सिलिकॉन वैली-वेस्ड भारतीय-अमेरिकी हैं. वह अभी वेंचर कैपिटल फर्म इन्वेंटस कैपिटल पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक हैं.

दिग्गज एंजेल निवेशक, जो हाल ही में भारत में थे, ने TV9 नेटवर्क से विस्तार से बात की. उन्होंने बताया कि स्टार्टअप स्पेस में क्या कमी है. उन्होंने प्रमुख शेयरहोल्डरों के मानसिकता में परिवर्तन की वकालत की.

स्टार्टअप की समस्या का कारण सरकार भी

रेखी कहते हैं, “समस्या का एक कारण सरकार है जिसने यूनिकॉर्न की स्थिति पर बहुत अधिक प्रीमियम लगाया है. एक यूनिकॉर्न काल्पनिक आंकड़ा है और हमें याद रखना चाहिए कि वैल्यूएशन बदलता रहता है.” रेखी का कहना है कि उन्होंने डलास में एक भारतीय दूतावास पर यूनिकॉर्न लहर देखी, जहां सफलता को यूनिकॉर्न के आधार पर आंका गया.

हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि भारत में स्टार्टअप्स की सफलता दर बाकी दुनिया की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक है. स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 16 जनवरी, 2016 को स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत की और एक कार्ययोजना भी बनाई गई.

स्टार्टअप की सफलता सिर्फ ‘यूनिकॉर्न’ स्टेटस नहींं

TiE के संस्थापक का नुस्खा यह है कि यूनिकॉर्न का मौजूदा स्टेटस “बहुत स्मार्ट पैमाना” नहीं है. यह पूछे जाने पर कि कौन सी चीज वैल्यूएशन को सही तरह से दर्शाती है, उनका तर्क है, “स्टार्टअप की सफलता की कहानी बताने के लिए वैल्यूएशन के बजाए अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं.”

रेखी के लिए मौजूदा मॉडल, जहां निवेशक एक आइडिया विशेष में पैसा लगा रहे हैं, त्रुटिपूर्ण है. वह कहते हैं, “बुनियादी समस्या यह है कि आपके पास निवेशक हैं जो उद्यमियों को पैसे दे रहे हैं और उन्हें बढ़ाने के लिए कह रहे हैं. पॉजिटिव इकनॉमिक यूनिट के निर्माण पर किसी का ध्यान नहीं है. यदि आप हर बार बेचने पर नुकसान सहते हैं तो यह एक सुखद स्थिति नहीं है. यूनिट इकनॉमिक्स बहुत जरूरी है.”

स्टार्टअप्स का मुनाफा कमाना बेहद जरूरी

बेहतर मॉडल विकसित करने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “मौजूदा वैल्यूएशन जुटाए गए पैसे पर आधारित हैं. हमें ऐसी कंपनियां बनाने की जरूरत है जो अधिक मजबूत और लाभदायक हों और बाजार उनकी वैल्यूएशन तय करे.”

यह पूछने पर मुनाफे के लिए किस क्षमता की पहचान की जानी चाहिए, इस एंजेल निवेशक ने कहा “यह उद्यमी की क्षमता है. यह उसकी बैलेंस शीट है. उसे बदलना होगा.”

मौजूदा स्टार्टअप परिदृश्य का आकलन करते हुए, रेखी कहते हैं, “भारत एक युवा राष्ट्र है जहां बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा हैं. वे अपने अवसर को बर्बाद नहीं करने वाले. हमें अपने उद्यमियों में विश्वास पैदा करना होगा. कुछ खराब लोग हैं, मार्केट को उन्हें बाहर निकाल देना चाहिए. गलत काम करने वालों को सजा देने का मार्केट का अपना तरीका है.”

यह मशहूर निवेशक भारत की विकास गाथा में दृढ़ विश्वास रखते हैं. वह लोकतंत्र को भारत की प्रमुख ताकत के रूप में देखते हैं और भारत को सहयोग देने के लिए अमेरिका का समर्थन करते हैं, क्योंकि दोनों देश एक निश्चित मूल्यों से जुड़े हुए हैं.

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(यह महामारी के बाद के युग में बिजनेस पर सीईओ/को-फाउंडरों और कुछ वीसी/कंसल्टेंट के साथ छोटे इंटरव्यू की चार ‘द सी-सूट’ सीरीज का भाग है. यह बातचीत एक व्यावसायिक विचार के पीछे की प्रेरणा से लेकर, चुनौतियों, और सफलता का मार्ग को कवर करती है.)

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