Egypt president abdel fattah el sisi will be chief guest on india republic day 2023 | गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे मिस्र के राष्ट्रपति, देशों के बीच संबंधों को मिलेगी मजबूती

भारत का यह कदम मिस्र के साथ राजनीतिक और सैन्य संबंधों को मजबूती प्रदान करने में मददगार होगा. इसके साथ ही भारत की इस प्रमुख अफ्रीकी देश तक पहुंच और मजबूत होगी.

गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे मिस्र के राष्ट्रपति, देशों के बीच संबंधों को मिलेगी मजबूती

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस साल की थी मिस्र के राष्‍ट्रपति से मुलाकात.

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26 जनवरी, 2023 को होने वाले भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सिसी मुख्य अतिथि होंगे. भारत ने उन्हें न्योता भेज दिया है. भारत का यह कदम मिस्र के साथ राजनीतिक और सैन्य संबंधों को मजबूती प्रदान करने में मददगार होगा. इसके साथ ही भारत की इस प्रमुख अफ्रीकी देश तक पहुंच और मजबूत होगी. इस साल दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों की अपनी 75वीं वर्षगांठ भी मनाई है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस साल मिस्र का दौरा कर चुके हैं. इस दौरे के दौरान दोनों ने ही मिस्र के राष्ट्रपति सिसी से मुलाकात करके उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश दिया था. ऐसे में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति सिसी के आने के साथ ही अगले कुछ महीनों में भारत और मिस्र के बीच संबंधों में और मजबूती आने की संभावना जताई जा रही है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था मिस्र का दौरा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस साल सितंबर में मिस्र का दौरा किया था. इस दौरान सैन्य क्षेत्र को लेकर दोनों देशों में चर्चा हुई थी. राजनाथ सिंह अपने दौरे के दौरान मिस्र के रक्षा मंत्री जनरल मोहम्मद जाकी से मिले थे. दोनों के बीच सैन्य क्षेत्र में भागीदारी और साझेदारी को लेकर करार हुए थे. इसमें सेना की ट्रेनिंग, रक्षा क्षेत्र में उपकरणों और हथियारों का साझेदारी में उत्पादन समेत कई मामलों पर सहमति बनी थी. इस दौरान यह बात भी सामने आई थी कि मिस्र भारत के स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान को खरीदने में दिलचस्पी रख रहा है.

भारत और मिस्र की वायुसेना में भी आपसी सहयोग देखने को मिला

अक्टूबर में गुजरात के गांधीनगर में हुए 12वें डिफेंस एक्सपो में भी मिस्र को आमंत्रित किया गया था. इस दौरान मिस्र ने इंडिया-अफ्रीका डिफेंस डायलॉग और आईओआर डिफेंस मिनिस्टर्स कॉन्क्लेव में भी शिरकत की थी. भारत और मिस्र की वायुसेना के बीच भी आपसी सहयोग देखने को मिल चुका है. 1960 के दशक में दोनों देश मिलकर लड़ाकू विमानों का उत्पादन कर चुके हैं. 1960 के दशक से लेकर 1984 तक भारतीय वायुसेना के पायलट मिस्र के पायलटों को ट्रेनिंग भी दे चुके हैं.

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