Diabetes patients eat 30 gram without cooked rice details in hindi | डायबिटीज के मरीज रोजाना खाएं 30 ग्राम कच्चे चावल, शुगर रहेगी कंट्रोल

शुगर के मरीजों को एक दिन में सिर्फ 45 से 60 ग्राम के बीच कार्बोहाइड्रेट्स लेने की सलाह दी जाती है. चूंकि चावल में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स होता है. इसलिए शुगर के मरीज़ों को इसे खाने से मना किया जाता है.

डायबिटीज के मरीज रोजाना खाएं 30 ग्राम कच्चे चावल, शुगर रहेगी कंट्रोल

डायबिटीज की बीमारी
में समय रहते इलाज है जरूरी

डायबिटीज तेजी से फैलने वाली बीमारी है. बता दें कि भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में डायबिटीज यानी शुगर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सिर्फ भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगभग 5 करोड़ के आसपास है. WHO के मुताबिक, साल 2030 तक भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या 8 करोड़ को पार कर जाएगी. दुनियाभर में 23 करोड़ लोग इस क्रॉनिक बीमारी के साथ जी रहे हैं. इस बीमारी के मरीज हमेशा इस उलझन में रहते हैं कि क्या खाएं और क्या नहीं.

खा सकते हैं कच्चे चावल

ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने के लिए शुगर रोगी को विशेषज्ञों की सलाह के साथ ही चावल को खाने में शामिल करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमेह रोगियों को यह भी पता होना चाहिए कि चावल कितनी मात्रा में खाना चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि मधुमेह रोगी दिन में कम से कम 30 ग्राम कच्चा चावल खा सकते हैं, तो दवा से ब्लड शुगर को कंट्रोल करना संभव है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि मधुमेह रोगियों में प्रतिदिन कार्बोहाइड्रेट का सेवन रोगी के कद, वजन, व्यायाम और डाइट पर निर्भर करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमेह रोगी निश्चित समय के अंतराल पर कम हिस्से में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी का सेवन कर सकते हैं.

डायबिटीज के मरीज खाएं ये डाइट

शुगर के मरीजों को एक दिन में सिर्फ 45 से 60 ग्राम के बीच कार्बोहाइड्रेट्स लेने की सलाह दी जाती है. चूंकि चावल में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स होता है. इसलिए शुगर के मरीज़ों को इसे खाने से मना किया जाता है. हालांकि, ऐसा सभी चावल के साथ नहीं होता, क्योंकि कई ऐसे चावल होते हैं, जिसमें GI भी कम होता है और कार्बोहाइड्रेट्स भी कम पाया जाता है. ग्लाइसेमिक इंडेक्स उन चावलों में कम होता है जिनमें स्टार्च कम पाया जाता है। उसना चावल इसका सबसे बेहतर विकल्प है. इसके अलावा बासमती, ब्राउन और वाइल्ड राइस में भी बहुत कम जीआई होता है.

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( इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. TV9 Hindi इनकी पुष्टि नहीं करता है. किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही इस पर अमल करें.)

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