CJI DY Chandrachud Said Lawyers Strict Dress Code must reconsidered | वकीलों के ‘सख्त ड्रेस कोड’ पर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ बोले- इसपर दोबारा करेंगे विचार

चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने सर्दियों की छुट्टियों से पहले अदालत में लंबित स्थानांतरण याचिकाओं को निपटाने की बात कही. उन्होंने कहा कि अदालत में करीब 3000 स्थानांतरण याचिकाएं पेंडिग हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जमानत याचिकाओं के निपटान में भी तेजी लाई जानी चाहिए.

वकीलों के 'सख्त ड्रेस कोड' पर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ बोले- इसपर दोबारा करेंगे विचार

सीजेआई डी. वाई. चंद्रचूड़.

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देश में वकीलों के सख्त ड्रेस कोड पर भारत के चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि इसपर दोबारा विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि गर्मियों के मौसम के दौरान जलवायु परिवर्तन की वजह से काफी गर्मी होती है. इसलिए वकीलों द्वारा काले कोट को पहनने की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि इस कानूनी पेशे को अपनी औपनिवेशिक आधारों को दूर कर देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारत में गर्मियों में क्लाइमेट चेंज की वजह से काफी गर्मी पड़ती है. इसलिए हमें वकीलों के सख्त ड्रेस कोड पर पुनर्विचार करना चाहिए, खासकर गर्मियों में. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी और मांग की गई थी कि काला कोट और गाउन पहनने की अनिवार्यता से छूट दी जाए. जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने इसपर विचार करने से साफ इनकार कर दिया था और कहा था कि शीर्ष अदालत अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर विचार नहीं कर सकती, इसलिए याचिकाकर्ता अपनी शिकायत लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के पास जाएं.

वकीलों के लिए ड्रेस कोड फॉलो करना जरूरी

याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि भीषण गर्मी के दौरान कोट पहनने से वकीलों के लिए एक अदालत से दूसरी अदालत में जाना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि काफी गर्मी पड़ती है. वकीलों का ड्रेस कोड अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों द्वारा शासित होता है. इसके तहत एक वकील के लिए सफेद शर्ट और सफेद नेकबैंड के साथ एक काला कोट पहनना अनिवार्य है. नियमों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में पेश होने के अलावा वकीलों के लिए गाउन पहनना एक ऑप्शन है.

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स्थानांतरण याचिकाओं का जल्द निपटान

हाल ही में सीजेआई का पदभार संभालने वाले डी. वाई. चंद्रचूड़ ने सर्दियों की छुट्टियों से पहले अदालत में लंबित स्थानांतरण याचिकाओं को निपटाने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि अदालत में करीब 3000 स्थानांतरण याचिकाएं पेंडिग हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जमानत याचिकाओं के निपटान में भी तेजी लाई जानी चाहिए. सीजेआई ने कहा, ‘अभी अदालत में 13 पीठें चल रही हैं, इसलिए हमारी यह कोशिश रहेगी कि सर्दियों की छुट्टियों से पहले हर दिन लगबग 130 स्थानांतरण याचिकाओं का निपटान किया जाए. सुप्रीम कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जमानत के मामलों की सूची बनाई जाए और उनका निपटारा जल्द से जल्द किया जाए.

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