Bisleri deal why RJC is selling his business know its relation with tata and his daughter | बेटी ने बिसलेरी को किया ‘टाटा’ तो बेचना पड़ रहा कारोबार, दर्द देने वाला लेना पड़ा फैसला

दिग्गज उद्योगपति रमेश चौहान ने गुरुवार को इस बात को कन्फर्म किया कि वह पैकेज्ड वाटर के कारोबार Bisleri को बेचने जा रहे हैं. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि वे बिसलेरी के लिए खरीदार की तलाश कर रहे हैं.

बेटी ने बिसलेरी को किया 'टाटा' तो बेचना पड़ रहा कारोबार, दर्द देने वाला लेना पड़ा फैसला

दिग्गज उद्योगपति रमेश चौहान ने गुरुवार को इस बात को कन्फर्म किया कि वह पैकेज्ड वाटर के कारोबार Bisleri को बेचने जा रहे हैं.

दिग्गज उद्योगपति रमेश चौहान ने गुरुवार को इस बात को कन्फर्म किया कि वह पैकेज्ड वाटर के कारोबार Bisleri को बेचने जा रहे हैं. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि वे बिसलेरी के लिए खरीदार की तलाश कर रहे हैं. और वे इस सिलसिले में कई कंपनियों से बात भी कर रहे हैं, जिसमें Tata कंज्यूमर प्रोडक्ट्स शामिल है. आपको बता दें कि चौहान ने सिर्फ 27 साल की उम्र में भारत में पैकेज्ड मिनरल बॉटल बेचना शुरू किया था.

1969 में उनकी कंपनी ने एक इटली के कारोबारी से बिसलेरी को खरीदा था. उसके बाद उन्होंने देश में मिनरल वाटर बेचना शुरू किया. 50 साल में बिसलेरी देश में मिनकल वाटर का सबसे बड़ा ब्रांड बन गया. चौहान ने बिसलेरी के अलावा थम्स अप, माजा और लिम्का जैसे सॉफ्ट ड्रिंक के ब्रांड्स की भी शुरुआत की थी.

बेटी को नहीं है कारोबार में रुचि

हालांकि, सवाल यह उठता है कि चौहान ने बिसलेरी को बेचने का फैसला क्यों किया. इसके पीछे वजह है कि उनके पास बिसलेरी को आगे संभालने के लिए कोई उत्तराधिकारी मौजूद नहीं है. दरअसल, चौहान ने पीटीआई को बताया कि उनकी बेटी की कारोबार संभालने में कोई रूचि नहीं है. उन्होंने बताया कि वे चाहते हैं कोई इस कारोबार को देखे और संभाले.

दरअसल, रमेश चौहान की तबीयत काफी संबे समय से ठीक नहीं चल रही है. और हाल के समय में उनकी सेहत में गिरावट आई है. हालांकि, पीटीआई के साथ बातचीत में उन्होंने टाटा के साथ डील पर बताया कि वे मौजूदा समय में चर्चा कर रहे हैं और इस पर आगे कुछ नहीं बता सकते हैं.

टाटा पर चौहान को है भरोसा

लेकिन अब इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चौहान बिसलेरी को टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को करीब 6,000 करोड़ से 7,000 करोड़ रुपये में बेचने जा रहे हैं. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, चौहान ने कहा कि बिसलेरी को बेचना एक दर्द देने वाला फैसला था. चौहान को भरोसा है कि टाटा ग्रुप ज्यादा बेहतर तरीके से कंपनी की देखभाल करेगा और उसे आगे बढ़ाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा है कि उन्हें टाटा का कल्चर पसंद है और इसलिए उन्होंने दूसरे रूचि रखने वाली कंपनियों द्वारा काफी जोर लगाने के बावजूद टाटा को लेकर अपना फैसला लिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा के साथ यह बातचीत दो सालों से जारी है और उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और टाटा कंज्यूमर के सीईओ सुनील डिसूजा से मिलने के बाद अपना फैसला ले लिया. उन्होंने ईटी से कहा कि वे उन्हें पसंद करती हैं. वे अच्छे लोग हैं.

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