Bijnor News Muslim religious guru said that if a woman is educated then country progress Taliban order is extremely conservative | औरत पढ़ी-लिखी तो मुल्क की तरक्की…मुस्लिम धर्म गुरु बोले- तालिबान का फरमान निहायती दकियानूसी

मुफ़्ती शमून कासमी ने कहा कि इस तालिबानी फरमान का फर्क वहां की उस आम गरीब जनता पर पडेगा, जिसको पढ़ाई की बेहद जरूरत है.मालदार लोग अपनी लडकियों को दूसरे देशों में पढने भेज देगें.

औरत पढ़ी-लिखी तो मुल्क की तरक्की...मुस्लिम धर्म गुरु बोले- तालिबान का फरमान निहायती दकियानूसी

बिजनौर में मुफ्ती शमून कासमी ने तालिबानी तुगलकी फरमान का जताया विरोध.

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तालिबान ने लड़कियों और महिलाओं की यूनिवर्सिटी शिक्षा पर रोक लगा दी है. इसके बाद यहां तालिबान के इस फरमान का विरोध शुरू हो गया है. इस बीच उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में तालिबानी फरमान का मुस्लिम धर्म गुरू और इस्लामी स्कॉलर विरोध करते हुए इस्लाम के उसूल के खिलाफ बता रहे है. दरअसल, राष्ट्रीय सर्व धर्म एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने अफगानिस्तान में यूनिवर्सिटी में लड़कियों की शिक्षा को बैन किए जाने के तालिबानी फरमान को सरासर गलत बताया है.

वहीं, मुफ्ती शमून कासमी का कहना है कि, अगर तालिबानी इस्लाम को मानने वाले हैं और इस्लाम की आईडियोलॉजी को मानते हैं. ऐसे में लड़कियों की शिक्षा को लेकर इस तरह का फरमान जारी नहीं करते यह इस्लाम के उसूलों के खिलाफ है. जहां हुजूर मोहम्मद सल्ललाहहो अलेहि वसल्लम ने लडके लड़कियों और पुरुष महिलाओं को इस्लाम में बराबर का दर्जा दिया है. जहां हुजूर मोहम्म्द साहब ने मां, बेटी, बहन और बीवी को बेइंताह इज्जत देने और मोहब्बत करने की शिक्षा दी है.

मां की गोद होती है पहला मदरसा

दरअसल, इसके साथ ही इस्लाम धर्म में लडकियों को दीनी और दुनियावी शिक्षा पर जोर दिया है. वहीं, मुफ्ती शमून कासमी के मुताबिक, मां की गोद ही पहला मदरसा होती है. अगर मां पढ़ी-लिखी है तो पूरे परिवार की दीनी और दुनियावी परवरिश और देखरेख हो जाती है, जिससे आनेवाली नस्ले भी पढती लिखती है. साथ ही अपना और अपने परिवार के साथ साथ मुल्क की तरक्की में सहारा बनती है.

क्या है मामला?

राष्ट्रीय सर्वधर्म एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने तालिबान सरकार द्वारा अफगानिस्तान में यूनिवर्सिटीज में लडकियों की शिक्षा पर रोक लगाने के आदेश को निहायती दकियानूसी बताया है, साथ ही फरमान बताते हुए कहा कि इन्हीं वजहों से आज भी अफगानिस्तान में मिट्टी के बने घरों मे लोग गुरवत की जिंदगी जीने को मजबूर है, जबकि दुनियाभर के ज्यादातर मुल्क तरक्की करके विकसित देश बन चुके है. इसलिए तालिबान ने अफगानिस्तान की लडकियों पर यूनिवर्सिटी शिक्षा को बैन करके ठीक नहीं किया.

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तालिबानी फरमान का फर्क गरीब आवाम पर पड़ेगा- मुफ्ती शमून

इस दौरान मुफ़्ती शमून कासमी ने कहा कि इस तालिबानी फरमान का फर्क वहां की उस आम गरीब जनता पर पडेगा, जिसको पढ़ाई की बेहद जरूरत है,मालदार लोग अपनी लडकियों को दूसरे देशों में पढने भेज देगें, लेकिन गरीब आम जनता पैसौं के अभाव में अपनी बेटियों को घर बैठाने को मजबूर हो जाएगी. साथ ही उन्होंने बताया कि दुनियाभर के दूसरे देशों को तालिबान सरकार के इस तुगलकी गैर जरूरी फरमान को वापिस लेने को दबाव बनाना चाहिए. जिससे बेटियों को शिक्षा और बराबरी का हक मिल सके.

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