BIHAR Jagdababu displeasure RJD LALU YADAV ANAND MOHAN SINGH becoming substitute Rajput leader | जगदाबाबू की नाराजगी नहीं है RJD पर भारी, क्या आनंद मोहन सिंह को विकल्प बनाने की है तैयारी ?

आनंद मोहन सिंह रघुवंश बाबू और नरेंद्र सिंह के निधन के बाद बिहार में बड़े राजपूत नेता हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि आनंद मोहन सिंह आरजेडी की राजनीति में फिट हैं और अभी नीतीश कुमार के गुडबुक में भी.

जगदाबाबू की नाराजगी नहीं है RJD पर भारी, क्या आनंद मोहन सिंह को विकल्प बनाने की है तैयारी ?

आनंद मोहन सिंह की बेटी की सगाई में पहुंचे थे सीएम नीतीश

आरजेडी नेता और लालू यादव के करीबी कहे जाने वाले जगदानंद सिंह पिछले करीब दो महीने से पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों से दूर है. जगदानंद सिंह 9 और 10 अक्टूबर को दिल्ली में आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल नहीं हुए थे. इस दौरान वह अपने गांव में थे. पिछले सप्ताह वह पटना लौट आए हैं. इसके बाद भी वह पार्टी कार्यालय नहीं पहुंचे हैं. दरअसल जगदानंद सिंह के बारे में कहा जा रहा है कि वह बेटे सुधाकर सिंह को मंत्री पद से हटाए जाने के बाद नाराज है. 2 अक्टूबर को सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा था बड़े काम के लिए त्याग करना पड़ता है.

इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से पार्टी के किसी कार्यक्रम में नहीं दिखे. इस बीच यह दावा किया जा रहा है कि जगदानंद सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. इधर जगदाबाबू के नाराज होने की बात सामने आने के बाद आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद भी उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं दे रहे हैं. कहा जा रहा है कि आरजेडी आनंद मोहन को जगदा बाबू का विकल्प बनाने की तैयारी कर रही है.

अब सक्रिय नहीं है जगदाबाबू

जगदानंद सिंह बिहार के बड़े राजपूत नेता के तौर पर गिने जाते हैं. लेकिन 2019 में लोकसभा चुनाव में हार के बाद वह सक्रिय राजनीति से ज्यादा पार्टी के ऑफिशियल काम देखने वाले नेता बन गए है. इधर उनके बेटे सुधाकर सिंह भी पार्टी लाइन पर खड़े नहीं उतर रहे हैं. सुधाकर सिंह को लालू यादव ने नीतीश सरकार में कृषि मंत्री बनाया था.

अपनी ही सरकार पर हमलावर सुधाकर सिंह

मंत्री बनने के बाद सुधाकर सिंह ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. जिसके बाद लालू यादव ने उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा था. लालू यादव नहीं चाहते हैं कि पार्टी का कोई नेता नीतीश के खिलाफ बोले इससे महागठबंधन में दरार आए और तेजस्वी के सीमए बनने की राह में मुश्किलें पैदा हो.

आरजेडी की राजनीति में फिट आनंद मोहन

इधर आनंद मोहन आरजेडी की राजनीति में फिट बैठते हैं. सजायाफ्ता होने और जेल से छूटने के बाद वह भले ही अभी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. लेकिन उनकी राजनीति में अभी भी क्रेज बचा हुआ है. यह उनके पैरौल पर निकलने के बाद दिखा. दूसरी तरह आनंद मोहन भी जगदाबाबू की तरह बीजेपी विरोध की राजनीति करते रहे हैं.रघुवंश बाबू और नरेंद्र सिंह के निधन के बाद बिहार में बड़े राजपूत नेता की कमी महागठबंधन के लिए पूरी करने की झमता रखते हैं. सबसे बड़ी बात यह हे कि आनंद मोहन सिंह अभी नीतीश कुमार के गुडबुक में भी नजर आ रहे हैं.

आनंद मोहन सिंह के साथ सहज दिखे नीतीश

9 नवंबर को आनंद मोहन सिंह की बेटी की सगाई थी. सगाई कार्यक्रम में जिस तरह नीतीश मंत्रिमंडल के बड़े चेहरे वहां पहुंचे उसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि आनंद मोहन को पैरोल के बाद अब स्थाई रिहाई भी मिलने वाली है. वैसे भी आनंद मोहन अपनी सजा पूरी कर चुके हैं और अब सरकार पर यह निर्भर करता है कि वह उसे कब रिहा करती है.बेटी की सगाई के मौके पर आनंद मोहन सिंह और नीतीश कुमार सहज थे. एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा रहे थे.

ये भी पढ़ें



लालू विरोध का थे कभी चेहरा

आनंद मोहन सिंह कोशी क्षेत्र में सवर्णों के बड़े नेता माने जाते थे. कभी बिहार में लालू विरोध का चेहरा और सीएम फेस थे. आनंद मोहन सिंह आजकल आरजेडी की राजनीति कर रहे हैं. उनके बेटे चेतन आनंद शिवहर के विधायक हैं. आनंद मोहन सवर्ण खासकर करीब चार प्रतिशत रातपूत वोट को महागठबंदन के साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. 20 नवंबर को आनंद मोहन का पैरोल खत्म हो रहा है. उससे पहले मंगलवार को ललन सिंह का उनके घर मिलने जाना. राजनीति के जानने वाले इसके कई मायने निकाल रहे हैं.

techo2life

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *