Atal Bihari Vajpayee Addressed the election rally in Mandi Sukhram | ‘इस सुख राम ने बड़ा दुख दिया है’, मंडी में अटल जी ने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए क्यों कही थी ये बात?

साल 1989 में अटल बिहारी वाजपेयी मंडी में चुनाव प्रचार के लिए आए थे. उनका सारा भाषण पार्टी की नीतियों व देश की मौजूदा हालत पर केंद्रित किया था. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर भी कई बातें कही थीं.

'इस सुख राम ने बड़ा दुख दिया है', मंडी में अटल जी ने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए क्यों कही थी ये बात?

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हिमाचल के मंडी जिले के साथ गहरा नाता रहा . नाता इस कारण से कि शायद ही कोई ऐसा चुनाव रहा हो जब वह मंडी में प्रचार के लिए नहीं आए हों. प्रधानमंत्री बनने के बाद वह दो बार मंडी के पड्डल मैदान में आए और चुनावी रैलियों को संबोधित किया. मगर उससे पहले भी वह हर चुनाव में प्रचार के लिए मंडी आते रहे हैं. मंडी के लोग अटल बिहारी वाजपेयी का नाम आज भी बड़े आदर के साथ लेते हैं.

एक बार मंडी शहर के सेरी मंच से उन्होंने संबोधन में मंडी वासियों से कहा था कि जब भी मैं यहां आता हूं, आप सब लोग सब काम धाम छोड़ कर मुझे सुनने आते हो, खूब संख्या में आते हैं. मगर वोट हमारे उम्मीदवार को क्यों नहीं देते. हर बार यहां से हमारा उम्मीदवार हार जाता है, वोट भी दे दिया करो. एक बार मंडी में भाषण देते हुए उन्होंने दो प्रसंग सुनाए, जिस पर उन्हें खूब तालियां भी मिली थीं.

साबुन बनाने वाली कंपनियों पर ली थी चुटकी

उन्होंने कहा कि टीवी पर एक नंग धड़ंग युवक नहाते हुए आता है और कहता है लाइफ बाय है, जहां तंदरूस्ती है वहां, उन्होंने चुटकी ली कि मल्टी नेशनल कंपनियां साबुन बना रही हैं. खूब प्रचार करती हैं और बेचती हैं. क्या भारतीय कंपनियां ऐसा साबुन नहीं बना सकतीं. इसी जनसभा में उन्होंने बाटा कंपनी के जूतों के रेट पर भी चुटकी ली थी कि ये कंपनियां अपने को ईमानदार बताने के लिए अपने रेट ऐसे लगाती हैं जैसे यह अहसास दिला रही हों कि हम एक पैसा भी ग्राहक से ज्यादा नहीं लेते. उनके रेट 99 रूपए 95 पैसे जैसे होते हैं, जो बेहद हैरानीजनक लगते हैं.

अटल जी की इस बात पर खूब बजी थीं तालियां

1989 के चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी जब भारी सर्दी और बरसात में मंडी प्रचार के लिए आए थे तो उन्होंने सारा भाषण पार्टी की नीतियों व देश की मौजूदा हालत पर केंद्रित किया था. जब वह भाषण खत्म करने लगे तो पीछे से भाजपा के एक नेता ने कहा कि सर कांग्रेस के उम्मीदवार को लेकर भी कुछ बोलो, वोट तो तभी मिलेंगे, जब विरोधी के खिलाफ कुछ बोलेंगे. इस पर उन्होंने मुस्कराते हुए चिरपरिचित अंदाज में गर्दन को टेढ़ा करते हुए कहा कि , इस सुख राम ने भी बड़ा दुख दिया है, इस पर भीड़ से खूब तालियां भी मिलीं और ठहाका भी जोर का लगा. इसके साथ ही उन्होंने भाषण खत्म कर दिया.

उन दिनों केंद्र में मंत्री रहते हुए पंडित सुख राम चीनी घोटाले में फंस गए थे. देश में चीनी की किल्लत हो गई थी, ब्लैक माकेर्टिंग होने लगी थी और पंडित सुख राम जो केंद्र में खाद्य मंत्री थे और उन पर ही चीनी घोटाले के आरोप लगे थे. इसी को लेकर अटल ने जो चुटकी ली उससे सारे भाषण का सारांश निकल गया और लोगों ने जमकर तालियां पीटी थी.

मंडी पंडित सुख राम का गढ़ रहा है

मंडी पंडित सुख राम का गढ़ रहा है, उस समय वह कांग्रेस के उम्मीदवार हुआ करते थे. यहां से भाजपा को पहली बार 1990 में ही जीत मिल पाई थी, तब भाजपा के कन्हैया लाल जीते थे. जब उनके सामने सुख राम नहीं थे, बल्कि कांग्रेस के दुर्गा दास ठाकुर थे. सुख राम उन दिनों केंद्र की राजनीति में चले गए थे और अपने शिष्य दुर्गादास ठाकुर को आगे लाए थे.दूसरी जीत भाजपा को 2017 में उस समय मिली, जब पंडित सुख राम के पुत्र अनिल शर्मा भाजपा में शामिल होकर चुनाव लड़े और जीते. इसके अलावा यहां से कभी भाजपा या जनता पार्टी का उम्मीदवार नहीं जीता.

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