Aisshpra gems and jewels success story how a small shop became big brand of jewelry | किराए की दुकान में जरी-गोटा बेचने से हुई शुरुआत, आज ज्वेलरी का बड़ा ब्रांड है Aisshpra

ऐशप्रा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ऐश्वर्य और प्रगति. यह नाम रखने के पीछे कंपनी का उद्देश्य था कि कि ग्राहकों का ऐश्वर्य बढ़े, जिससे उनके साथ-साथ ब्रांड की भी प्रगति हो.

किराए की दुकान में जरी-गोटा बेचने से हुई शुरुआत, आज ज्वेलरी का बड़ा ब्रांड है Aisshpra

ऐशप्रा ब्रांड की कहानी

ऐशप्रा का नाम आपने सुना होगा! उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर की एक ज्वेलरी कंपनी. ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स (Aisshpra Gems and Jewels) भारतीय बाजार में एक विश्वसनीय ज्वेलरी ब्रांड है, जो पिछले कई वर्षों से ग्राहकों के दिलों में अपना स्थान बनाए हुए है. वह अपनी सिंपल लेकिन क्रिएटिव डायमंड डिज़ाइन के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि हीरे के आभूषण का कारोबार करने वाले इस कंपनी की शुरूआत जरी-गोटा के किराए के दुकान से हुई थी?

जरी-गोटे का काम करने वाले बाद में चांदी के आइटम्स बेचने लगे. बढ़ती मांग और ग्राहक का बढ़ता भरोसा देखते हुए इन्होंने अपने कलेक्शन में गोल्ड ज्वेलरी को भी जोड़ा. ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स की इसी गुणवत्ता को देखते हुए गोरखपुर के निवासी बालकृष्ण और उनके बड़े भाई गोपी कृष्ण ने मिलकर उत्तर प्रदेश में ब्रांड ज्वेलरी शोरूम की स्थापना की. आज कंपनी एक ब्रांड के तौर पर स्थापित हो चुकी है.

तो आइए आज की ब्रांड स्टोरी में जानते हैं, जरी-गोटा बेचने वाले किराए की दुकान से सफर शुरू करते हुए हीरे का कारोबार करने वाली ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स ब्रांड की कामयाबी की कहानी.

ऐशप्रा यानी ऐश्वर्य और प्रगति

ऐशप्रा जेम्स एंड ज्यूल्स ब्रांड की शुरुआत 1940 में हुई थी. ऐशप्रा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ऐश्वर्य और प्रगति. यह नाम रखने के पीछे कंपनी का उद्देश्य था कि कि ग्राहकों का ऐश्वर्य बढ़े, जिससे उनके साथ-साथ ब्रांड की भी प्रगति हो. यह ब्रांड हरि प्रसाद गोपी कृष्ण सराफ ग्रुप का वेंचर है. हरि प्रसाद गोपी कृष्ण सराफ ग्रुप को उनके पिता बालकृष्ण और उनके बड़े भाई गोपी कृष्ण ने मिलकर शुरू किया था.

82 साल पहले, बालकृष्ण और गोपी कृष्ण ने मिलकर 100 वर्गफीट का एक किराए का स्टोर खरीदा. इसमें उन्होंने जरी-गोटा का कारोबार शुरू किया. धीरे-धीरे इसमें सोने और चांदी के आइटम्स जैसे पायल, बिछिया आदि भी जुड़ने लगें. ग्राहकों की मांग को ध्यान में रखते हुए कृष्ण ब्रदर्स ने अपने कलेक्शन में अन्य कई ज्वेलरी को भी जोड़ा. साल 1990 के आसपास ऐशप्रा ने अपने क्लेकेशन में डायमंड ज्वेलरी को एड किया.

ग्राहकों से मिला अच्छा रेस्पॉन्स

गोरखपुर और उसके आसपास के इलाके में उस वक्त डायमंड ज्वेलरी एक नई चीज थी. इसके बाद ऐशप्रा ने बायबैक गारंटी और सर्टिफिकेशन के साथ डायमंड ज्वेलरी को प्रमोट करने का फैसला किया. प्रमोशन के दौरान उन्हें ग्राहकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली. नतीजतन साल 1995 में कंपनी ने किराए पर लिए गए 100 वर्गफीट के स्टोर को पूरी बिल्डिंग समेत खरीद लिया.

अब ऐशप्रा ब्रांड का कारोबार 10000 वर्गफीट के शोरूम से चल रहा है. वर्तमान में ब्रांड को इसकी दूसरी व तीसरी पीढ़ी संभाल रही है. ऐशप्रा के डायरेक्टर अनूप सराफ हैं, जिनके कार्यकाल में नए मार्केट में ब्रांड का नया ज्वेलरी शोरूम 10000 वर्गफीट में बनकर तैयार हुआ है.

कंपनी ने हासिल किए कई पुरस्कार

देश के सात विभिन्न शहरों में ऐशप्रा ज्वेलरी ब्रांड की 8 स्टोर से कंपनी की सक्रिय उपस्थिति है. इस तरह से यह पूरे उत्तर भारत में अपना खुद का ब्रांड शुरू करने वाले पहले रिटेल विक्रेता बन गए हैं. ऐशप्रा को 20 राष्ट्रीय और 2 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है. ऐशप्रा के Jewelry दिखने में हलके और पहनने में एक नया लुक देते है. इनकी बनाई गई डिज़ाइन नए भारत की आधुनिकता को दर्शाती है. इसे पहनकर लोग अत्यधिक आकर्षित लगते हैं.

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