Air Pollution can damage lungs, Follow this tips for prevention | वायु प्रदूषण में कैसे रखें फेफड़ों को साफ, एक्सपर्ट से जानें इसके आसान नेचुरल तरीके

द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में भारत में होने वाली सभी मौतों में 11.5 प्रतिशत की वजह प्रदूषण से संपर्क माना गया है. पॉल्यूशन का असर लंग्स के अलावा शरीर के अन्य अंगों पर भी होता है.

वायु प्रदूषण में कैसे रखें फेफड़ों को साफ, एक्सपर्ट से जानें इसके आसान नेचुरल तरीके

वायु प्रदूषण

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स्नेहा कुमारी: उत्तर भारत में खराब होती हवा की गुणवत्ता यहां के लोगों के लिए स्वास्थ्य को लेकर चिंता का एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है. वायु प्रदूषण में मौजूद जहरीले कण फेफड़ों की गंभीर समस्या की वजह बन सकते हैं और उन लोगों को भी बीमार कर सकते हैं जिनको सांस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है. बुधवार सुबह को भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई थी लेकिन दिन में हवा की गति अनुकूल होने की वजह से इसमें सुधार का अनुमान लगाया जा रहा था.

राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 262 रहा है. मंगलवार की शाम चार बजे यह 227, सोमवार को यह 294 और रविवार को 303 था. द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में भारत में होने वाली सभी मौतों में से17.8 प्रतिशत और सांस, दिल और अन्य संबंधित बीमारियों से होने वाली मौत में से 11.5 प्रतिशत की वजह प्रदूषण से संपर्क माना गया है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर आप हाई पॉल्यूशन वाली जगह जैसे ही बिजी रोड पर जाते हैं तो आपको तुरंत ही इसका प्रभाव महसूस होगा. इसके लक्षण खांसी, थकान, सांस की नली में चुभन आदि हैं. हालांकि अगर आप ये लक्षण लगातार महसूस कर रहे हैं तो रिव्यू के लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्थमा के मरीजों को इन परिस्थितियों में इन्हेलर का ज्यादा प्रयोग करने की जरूरत पड़ सकती है.

सीओपीडी की बीमारी का खतरा अधिक

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की एक रिपोर्ट के अनुसार क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) लोगों में बीमारी का एक बड़ा कारण है जिनके दुनियाभर में अनुमानित मामले 300 मिलियन है और विश्व भर में मौतों की ये तीसरी बड़ी वजह है.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि COPD की सबसे बड़ी वजह – निवारण योग्य कारण सिगरेट धूम्रपान है और इस जोखिम को सीमित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अन्य एजेंटों के संपर्क को नियंत्रित करने से भी COPD के मामलों की संख्या को कम करने में मदद मिल सकती है. व्यावसायिक जोखिम भी COPD की एक प्रमुख वजह हैं जिसकी वजह से कुल मरीजों में से 14 प्रतिशत इसकी चपेट में आते हैं और 31 प्रतिशत मरीज वो हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया होता है.

वैसे इन फैक्ट्स में एक अच्छी बात ये है कि दवाएं खाए बिना भी फेफड़ों के स्वास्थ्य में सुधार करने के कई तरीके हैं. यह तो हम जानते ही हैं कि फेफड़े वे अंग हैं जो खुद अपनी सफाई कर लेते हैं और जैसे ही वे प्रदूषकों के संपर्क से दूर होते हैं, वे अपनी रिपेयरिंग शुरू कर देते हैं.

फेफड़ों को साफ कैसे रखें

फरीदाबाद फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के पल्मोनोलॉजी के निदेशक और एचओडी डॉ. रवि शेखर झा ने फेफड़ों को साफ करने और वायु प्रदूषण के कारण इनको पहुंचने वाले नुकसान को कम करने के नेचुरल तरीके बताए हैं.

उनका कहना है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने के बाद कुछ तरीकों को अपनाकर बीमारी से बचा जा सकता है. इसके लिए सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात आपका आहार है. प्रदूषण के कारकों की वजह से फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है और इन पर सूजन आ जाती है. ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें जैसे कि खट्टे फल आदि खाने से फेफड़ों को साफ करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, विटामिन सी के सप्लीमेंट भी लेने चाहिए. इनसे भी आपको फेफड़ों को साफ करने में मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा आपको इनडोर एक्सरसाइज बंद कर देनी चाहिए क्योंकि प्रदूषण के संपर्क में आने के बावजूद ब्रीदिंग एक्सरसाइज से आपको फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है. साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. पानी की मदद से शरीर को आसानी से डीटॉक्सिफाई किया जा सकता है यानी यह शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने का काम करता है. प्रकृति की देन पानी न केवल फेफड़ों से बल्कि हमारे शरीर के लगभग हर अंग के डीटॉक्सिफिकेशन के लिए जरूरी है.

डॉ. रवि शेखर झा के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में पानी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसकी मदद से लंग्स में जमा बलगम को बाहर निकालने में मदद मिलती है. साथ ही, हमें लोगों को वृक्षारोपण अभियान के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और अपने घर के अंदर भी हवा को साफ करने वाले पौधे लगाने चाहिए.

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