1990 Elections Congress was able to win only 9 seats out of 68 seats | हिमाचल: जब बागियों की बगावत ने कांग्रेस का बिगाड़ दिया था खेल, नौ सीटों पर सिमट गई थी पार्टी

1990 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के बड़े-बड़े नाम धराशायी हो गए थे . वीरभद्र सिंह जो दो सीटों से खड़े हुए थे, वह एक सीट से हार गए थे. कांगड़ा से सत महाजन बड़ा नाम थे, वह भी चारों खाने चित हो गए थे.

हिमाचल: जब बागियों की बगावत ने कांग्रेस का बिगाड़ दिया था खेल, नौ सीटों पर सिमट गई थी पार्टी

हिमाचल विधानसभा चुनाव 2022

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हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक समय ऐसा भी आया था, जब कांग्रेस में बगावत हो गई थी और कांग्रेस के कई बड़े दिग्गज नए दल में शामिल हो गए थे. उस समय यह लग रहा था कि शायद ही अब कांग्रेस प्रदेश में अपने पैरों पर खड़ी हो पाएगी.यह सियासी उलटफेर साल 1990 चुनाव के दौरान हुआ था. तब कांग्रेस प्रदेश की 68 सीटों में से केवल नौ ही सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी, जबकि भाजपा की झोली में 46 सीटें चली गई थीं.

1990 में देश में जनता दल का उदय बड़ी तेजी से हुआ था, जो कांग्रेस के खिलाफ मजबूत तरीके से उभरा. प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज व पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल जो जुब्बल कोटखाई से विधायक हुआ करते थे, ने कांग्रेस छोड़ दी व जनता दल का दामन थाम लिया. उन्हीं के साथ कांगडा से फायरब्रांड नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया भी जनता दल में आ गए.इन दोनों नेताओं की वीरभद्र सिंह के साथ तनातनी हो गई थी. यही वो चुनाव था, जिसमें ठाकुर रामलाल ने वीरभद्र सिंह को जुब्बल कोटखाई से हरा दिया था. यह बडा उलटफेर था. उस समय वीरभद्र सिंह दो हलको से खड़े हुए थे .वह रोहडू से जीत गए थे. मेजर विजय सिंह मनकोटिया भी इन चुनावों में शाहपुर हलके से 12677 मतों से जीते थे. यह उनकी बहुत बड़े अंतर से जीत थी.

बड़े बड़े नाम हो गए थे धराशायी

1990 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के बड़े बड़े नाम धराशायी हो गए थे . वीरभद्र सिंह जो दो हलके से खड़े हुए थे, वह एक हलके से हार गए. कांगड़ा से सत महाजन बड़ा नाम थे, वह भी चारों खाने चित हो गए थे. जेबीएल खाची भी अपनी सीट नहीं निकाल पाए थे. बृज बिहारी बुटेल,रघु राज,प्रेम सिंह, रामलाल ठाकुर, (नैनादेवी) आशाकुमारी,चंद्र कुमार,विपल्व ठाकुर और कौल सिंह ठाकुर जैसे दिग्गज हार गए थे. उस समय वीरभद्र सिंह, सुजान सिह पठानिया,नारायण चंद पराशर, गंगू राम मुसाफिर,राजा विजयेंद्र सिंह, विदया स्टोक्स, गुलाब सिंह ठाकुर, फुन्चुक राय और सिंघी राम ही अपनी सीटें निकाल पाए थे. बाकी सब धराशायी हो गए थे.

महेंद्र सिंह ठाकुर पहला चुनाव जीते थे

1990 में महेंद्र सिंह ठाकुर अपना पहला चुनाव धर्मपुर हलके से बतौर निर्दलीय उम्मीदार जीते थे. उन्होंने भाजपा के प्रियाव्रत को हराया था. तब से लेकर अब तक उन्होंने कभी भी हार का सामना नहीं किया. 1990 में शांता कुमार भी वीरभद्र सिंह की तरह की दो हलकों से खड़ हुए थे और दोनों ही हलकों से बडे अंतरों से जीते थे. जबकि वीरभद्र सिंह एक हलके से हार गए थे . 1990 के इन चुनावों में कम्यूनिस्ट पार्टी आफ इंडिया ने भी एक सीट जीती थी.

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जनता दल 11 सीटों पर रही थी विजयी

इस चुनाव में जनता दल ने 13 सीटों पर चुनाव लड़ा था व 11 पर जीत हासिल की थी. पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर राम लाल और फायरब्रांड विजय सिंह मनकोटिया जैसे नेताओं के उदय से लगने लगा था कि आगे प्रदेश में तीसरे विकल्प का उदय हो जाएगा. लेकिन दो ढाई साल में ही सब चौपट हो गया व ठाकुर रामलाल और मनकोटिया जैसे नेता कांग्रेस की चौखट पर आ गए. उनके साथ बाकी नेता भी लौट आए और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व को मंजूर कर लिया. तब से लेकर अब तक प्रदेश में तीसरा विकल्प कभी भी नहीं उभरा. 1998 में सुखराम ने हिविंका खड़ी की थी, तब जरूर लगा था कि प्रदेश में तीसरा विकल्प खड़ा हो जाएगा. लेकिन 2003 में सुखराम खुद कांग्रेस में चले गए और उनके चेले कुछ भाजपा तो कांग्रेस से जुड़ गए.

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